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CRPF Caution: सीआरपीएफ के 3.25 लाख कर्मियों के लिए अलर्ट, ऑपरेशनल सिक्योरिटी को जोखिम में डाल सकती है ये चूक

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 18 Aug 2025 05:50 PM IST
सार

केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) ने 3.25 लाख कर्मियों को सतर्क किया है। सुरक्षाबलों को आगाह किया गया है कि 'संभव एप्लीकेशन राइटर' पर जानकारी डालना, इससे फोर्स की ऑपरेशनल सिक्योरिटी, जोखिम में पड़ सकती है। जानिए क्या है पूरा मामला

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Security Forces Caution Alert for CRPF personnel mistakes can put operational security at risk hindi news
सीआरपीएफ (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के 3.35 लाख जवानों और अधिकारियों के लिए एक बड़ा अलर्ट है। 'संभव एप', जिस पर बल के सभी कार्मिकों की जानकारी उपलब्ध रहती है, उसे लेकर एक अनाधिकृत एप तैयार किया गया है। उस एप को 'संभव एप्लीकेशन राइटर' का नाम दिया गया है। ये एप, सोशल मीडिया प्लेटफार्म और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसमें दावा किया गया है कि यह एप सीआरपीएफ कार्मिकों के लिए स्वत: आवेदन तैयार कर देता है। सीआरपीएफ महानिदेशालय ने अपने सभी कार्मिकों को इस 'एप' को डाउनलोड/इंस्टॉल या उपयोग करने के लिए मना किया है। 'संभव एप्लीकेशन राइटर' पर जानकारी डालना, इससे फोर्स की ऑपरेशनल सिक्योरिटी, जोखिम में पड़ सकती है। 

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बता दें कि पांच वर्ष पहले सीआरपीएफ मुख्यालय ने अपने कार्मिकों के लिए 'संभव' मोबाइल एप तैयार कराया था। इस एप के जरिए वे अपनी वित्तीय एवं अन्य विभागीय जानकारी बिना किसी बाधा के जान सकते हैं। इसके लिए उन्हें 'एप' पर क्लिक करना होगा। 'संभव' एप को पीआईएस यानी पर्सनल इंर्फोमेशन सिस्टम की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
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सीआरपीएफ मुख्यालय ने 'संभव एप' तैयार होने के बाद अपनी सभी यूनिट्स से कहा था कि वे अधिकारियों व जवानों के मोबाइल नंबर पीआईएस पर अपडेट करा दें। वजह, नया सिस्टम 'संभव' तभी काम करता है, जब संबंधित कर्मी का मोबाइल नंबर उसमें अपडेट होगा। 
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यदि किसी कर्मचारी का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, तो वह इस एप का प्रयोग नहीं कर सकेगा। उसे वेतन एवं विभागीय पीआईएस से जुड़ी कोई जानकारी या नोटिफिकेशन प्राप्त नहीं होंगे। नई व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए कर्मियों का मोबाइल नंबर मौजूदा पीआईएस में होना अनिवार्य था। सभी कार्मिकों से कहा गया था  कि वे अपनी यूनिट में संपर्क कर यह चेक कर लें कि उनका मोबाइल नंबर, जो पहले से मौजूद है, क्या वह सही है। उसमें कोई अंक इधर-उधर तो नहीं हुआ है। यदि ऐसा हुआ तो संबंधित कर्मी को सेलरी, बिल और वेलफेयर से जुड़े नोटिफिकेशन नहीं प्राप्त होंगे।

बल मुख्यालय ने सोमवार को जारी दिशा निर्देशों में कहा है कि इस बात का पता चला है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे व्हाट्सएप और यू-ट्यूब आदि पर 'संभव' को लेकर एक एप होने की बात कही जा रही है। सोशल मीडिया समूहों में भी उक्त एप पर चर्चा हो रही है। इतना ही नहीं, गूगल प्ले स्टोर पर भी 'संभव एप्लीकेशन राइटर' मौजूद है। इस बाबत लगातार संदेश प्रसारित हो रहे हैं। इन संदेशों में दावा किया जा रहा है कि यह 'एप' बल कार्मिकों के लिए खुद ही आवेदन तैयार कर देता है। कार्मिकों को इस एप पर अपनी जानकारी डालनी होती है। 


सीआरपीएफ ने अपने कार्मिकों के लिए जारी अलर्ट में कहा है कि किसी भी स्थिति में 'संभव एप्लीकेशन राइटर' को डाउनलोड/इंस्टॉल न करें। यह एप सीआरपीएफ द्वारा विकसित, अनुमोदित अथवा अधिकृत नहीं है। इस एप का संचालन करने के लिए कई तरह की जानकारी अपलोड करनी पड़ती है। जैसे फोर्स नंबर, संबंधित यूनिट से जुड़ा विवरण और अन्य व्यक्ति/आधिकारिक डाटा, इस एप में अपलोड करना पड़ता है। इससे फोर्स और कार्मिकों की अहम जानकारी लीक हो जाती है। ऐसी जानकारी साझा करना, गंभीर परिचालन सुरक्षा जोखिम उत्पन्न कर सकता है। सभी बटालियन/कार्यालयों से यह अपेक्षा की जाती है, इस परामर्श को तत्काल सभी रैंकों तक पहुंचाया जाए। महानिदेशालय के निर्देशों का कठोर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। अगर इन निर्देशों का उल्लंघन होता है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। सभी जगहों पर सुबह के मार्कर और शाम के रोल कॉल में, कार्मिकों को उक्त जानकारी से अवगत कराया जाए।

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