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बंगाल विधानसभा चुनाव: नंदीग्राम बंगाल की ‘मेये’ का होगा या बंगाल के ‘छेले’ का

Thu, 01 Apr 2021 06:45 AM IST
Jeet Kumar रजनीश मिश्र, नंदीग्राम।
रजनीश मिश्र, नंदीग्राम। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 01 Apr 2021 06:45 AM IST
सार

  • नंदीग्राम : ममता-शुभेंदु में वर्चस्व की लड़ाई, अन्य सभी मुद्दे गौण

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second phase today Polling in West Bengal and Assam today
ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के तहत बृहस्पतिवार को यूं तो 30 सीटों पर मतदान होना है, मगर सभी निगाहें कोलकाता से करीब 130 किलोमीटर दूर पूर्व मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम सीट पर टिकीं हैं।

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यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कभी उनके सबसे खास सहयोगी रहे, अब भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। नंदीग्राम आखिर बंगाल की ‘मेये’ यानी बेटी का होगा या बंगाल के ‘छेले’ यानी बेटे का, यह तो 2 मई को ही पता चलेगा।
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दिलचस्प बात यह है कि यहां के चुनावी मुकाबले में विकास का मुद्दा गौण हो गया है और दो कद्दावर नेताओं ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच वर्चस्व की लड़ाई मुख्य मुद्दा है।
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नंदीग्राम में कुल मतदाता 2 लाख 46 हजार 434 (2019) हैं। शुभेंदु अधिकारी 2016 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर यहां से जीते थे। उस समय उन्हें इसमें से 67 फीसदी यानी 1 लाख 34 हजार 623 वोट मिले थे। 14 मार्च, 2007 में पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत के बाद ही तृणमूल कांग्रेस बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गई और 2011 में सत्ता में।

भवानीपुर छोड़ नंदीग्राम क्यों गईं ममता : ममता का अचानक अपनी भवानीपुर सीट छोड़कर नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला चौंकाने वाला रहा है। दरअसल, 2011 में ममता को भवानीपुर उपचुनाव में 77.46% वोट मिले थे। लेकिन 2016 में यह 47.67% रह गया व 2019 के लोस चुनाव में भाजपा को यहां बढ़त मिल गई।

शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा
शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत कांग्रेस से हुई। 1995 में कांथी निगम पार्षद चुनाव से शुरू की। पहली बार 2006 कांथी से विधानसभा चुनाव जीते और उसी साल कांथी नगर निगम के अध्यक्ष बने। 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोला और भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी का नेतृत्व किया। शुभेंदु अधिकारी 2009 और 2014 लोक सभा चुनाव टीएमसी से जीते।

इन 30 सीटों पर होंगे मतदान
गोसाबा, पथप्रतिमा, काकद्वीप, सागर, तमलुक, पांशकुरा (204), पांशकुरा (205), मोयना, नंदकुमार, माहीसदल, हल्दिया, नंदीग्राम, चांदीपुर, खड़गपुर सदर, नारायणगढ़ पश्चिम, सबंग पश्चिम, पिंगला पश्चिम, देबरा पश्चिम, दासपुर पश्चिम, घटाल पश्चिम, चंद्रकोना पश्चिम, केशपुर पश्चिम, तलाडांगरा, बांकुड़ा, बजरोड़ा, ओंडा, बिष्णुपुर, कटुलपुर, इंद्र, सोनामुखी।  

राजनीतिक समीकरण
नंदीग्राम में पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा यहां तीसरे नंबर पर थी। भाजपा को 2016 में 10,713 वोट मिले थे, जबकि 2011 में 5,813 वोट। 2019 में तमलुक लोकसभा सीट ( नंदीग्राम इसी के तहत आता है) पर शुभेंदु अधिकारी के भाई दिव्येंदु अधिकारी जीते थे।

असम में भाजपा को गढ़ बचाने की चुनौती
असम में भाजपा के सामने अपनी सरकार बचाने की चुनौती है। असम में बृहस्पतिवार को दूसरे चरण में 39 सीटों पर मतदान हाेगा 126 सीटों वाली विधानसभा में इससे पूर्व पहले चरण में 47 सीटों पर मतदान हुआ था।

दूसरे चरण में बराक घाटी की 15 विधानसभा सीट हैं। 2016 में भाजपा ने यहां 8 सीटें जीती थीं। जिनमें छह कछार जिले की और दो करीम जिले की थीं। परिमल शुक्लबैद्य धोलाई सीट से सातवीं बार भाजपा के टिकट से लड़ रहे हैं। राज्यसभा सांसद बिश्वजीत दैमारी पानेरी सीट से मैदान में हैं। वहीं, असम साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष परमानंद राजवंशी सिपाझार से किस्मत आजमा रहे हैं। उधर, डिफू सीट से पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सुम रोंगहांग मैदान में हैं।

भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने असम में 2016 में जबर्दस्त जीत दर्ज की थी। भाजपा गठबंधन को 126 में से 86 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इस जीत के साथ ही भाजपा गठबंधन ने असम की सत्ता पर 15 साल से काबिज तरुण गोगोई नीत कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था।

345 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में होगी बंद बड़े नेताओं से सजा रहा प्रचार अभियान
भाजपा के शीर्ष नेताओं में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तीन रैलियां कीं। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बदरपुर और सोनाई तो स्मृति ईरानी ने बरभाग, गौरीपुर और धुबड़ी में रैलियों को संबोधित किया।


कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी ने महाजोट के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया। दूसरे चरण के मतदान में 39 विधानसभा क्षेत्रों से 345 उम्मीदवार चुनावी मैदान में भाग्य आजमा रहे हैं। राज्य के चार मंत्री और डिप्टी स्पीकर की किस्मत भी इसी चरण में ईवीएम के हवाले होगी।

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