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West Bengal: ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना की सुरंग पर काम के दौरान दस घरों में आईं दरारें, दहशत में लोग
Fri, 14 Oct 2022 08:05 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 14 Oct 2022 08:05 PM IST
सार
दस इमारतों के 130 से ज्यादा निवासियों की चिंता अब भी कम नहीं हुई है। कोलकाता मेट्रोल रेल कॉर्पोरेशन (केएमआरसी) के महाप्रबंधक (प्रशासन) ए.के. नंदी ने बताया कि निवासियों को केएमआरसी द्वारा पास के होटलों में कमरे दिए गए हैं।
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East West Metro Services Kolkata
- फोटो : Twitter METRO RAIL KOLKATA
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विस्तार
कोलकाता के बोबाजार इलाके में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट की सुरंग पर काम चल रहा था। लेकिन, शुक्रवार को इसके चलते 10 घरों में दरारें आ गईं। जिस कारण इन घरों के 130 से ज्यादा निवासी दहशत में हैं। कई निवासियों को घर छोड़ना पड़ा है। ये लोग अपना सामान घर पर ही छोड़ गए हैं।
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यह मेट्रो प्रोजेक्ट आईटी हब सेक्टर-पांच को हावड़ा मैदान से जोड़ेगी। मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम कर रही एजेंसी केएमआरसी ने कहा है कि नियम के अनुसार पंद्रह दिनों के भीतर स्थानीय निवासियों और दुकान के मालिकों को वित्तीय मुआवजा देने का प्रयास किया जाएगा।
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हालांकि, दस इमारतों के 130 से ज्यादा निवासियों की चिंता अब भी कम नहीं हुई है। कोलकाता मेट्रोल रेल कॉर्पोरेशन (केएमआरसी) के महाप्रबंधक (प्रशासन) ए.के. नंदी ने बताया कि निवासियों को केएमआरसी द्वारा पास के होटलों में कमरे दिए गए हैं।
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अधिकारियों द्वारा क्षतिग्रस्त मकान छोड़ने के लिए कहा गया। बी.बी. गांगुली गली पर खड़े एक बुजुर्ग दंपति ने कहा कि वे जल्द से जल्द अपने घर पर वापस जाना चाहते हैं। वह कहते हैं, हमारे लिए अपनी छत के नीचे रहने से ज्यादा कुछ मायने नहीं रखता है।
एक प्रभावित दुकान मालिक अशोक सरकार बताते हैं कि जब उन्हें दुकान खाली करने के लिए कहा गया तो वह अपना सारा सामान बाहर नहीं ला सके। अशोक ने बताया, मुझे अपना ज्यादातर माल दुकान में ही छोड़कर बाहर आना पड़ा। हमें दूसरी बार जाने की अनुमति नहीं है।
इलाके के एक अन्य निवासी अनूप मैती बताते हैं कि जो लोग प्रभावितों के बगल के घरों में रहते हैं, वे भी चिंतित हैं कि उनकी इमारतों को भी ऐसा ही नुकसान हो सकता है। वो आगे कहते हैं, इस तरह की अनिश्चितताओं से प्रभावितों के साथ-साथ आस-पास के लोगों में भी दहशत पैदा हो गई है। उन्होंने समस्या के स्थायी समाधान की मांग की और कहा कि मेट्रो अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए ऐसा दोबारा न हो।
बोबाजार, शहर का एक बहुत पुराना मध्यमवर्गीय इलाका है। यहां बनाई गई इमारतें सदियों पुरानी हैं। बिश्वजीत मोतीलाल का घर दो सौ साल से ज्यादा पुराना है। 11 मई को सुरंग के काम के दौरान भूमिगत जल रिसने से उनकी जमीन धंस गई, जिस कारण उनके घर में दरार आ गई।
मोतीलाल ने बताया कि उन्हें अगले दिन कई न्य लोगों के साथ एक होटल में स्थानांतरित कर दिया गया था। तब से एक रिश्तेदार के फ्लैट में रह रहे हैं, जबकि कई अन्य अस्थायी लोग केएमआरसी द्वारा प्रदान किए गए आवासीय फ्लैट्स में रह रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, हमें नहीं पता कि हम अपने खुद के बनाए घरों कब वापस जा पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केएमआरसी के अधिकारियों ने उनकी समस्या को उस गंभीरता से नहीं लिया जिसके वह हकदार हैं।