SCO summit: क्या बिलावल के भारत आने से दूर होगी पाकिस्तान की गरीबी? अमेरिका को ऐसे साध रहा है पाक
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विस्तार
पाकिस्तान के विदेश मत्री बिलावल अली भुट्टो गोवा में हैं। वह यहां शंघाई सहयोग संगठन के बहुपक्षीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं। लेकिन भुट्टो के गोवा पहुंचने के पीछे पाकिस्तानी नेताओं की ओर से न सिर्फ अलग-अलग तरह के तर्क दिए जा रहे हैं, बल्कि सियासत भी गर्म हो गई है। पाकिस्तान के सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी हो रही है कि क्या विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा से पाकिस्तान के बदहाल हालात में खासतौर से आर्थिक स्तर पर कुछ सुधार भी होगा। विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि कंगाली के कगार पर पहुंचे पाकिस्तान को अब चीन से कोई विशेष आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद तो नहीं दिख रही है। इसीलिए वह भारत के साथ बहुपक्षीय मामलों में ही सही अपनी उपस्थिति दिखाकर अमेरिका जैसे देशों से मदद करने की उम्मीद लगा रहा है।
पीटीआई ने किया विरोध
गोवा में चल रही शंघाई सहयोग संगठन की बहुपक्षीय बैठक में शिरकत करने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल अली भुट्टो यहां मौजूद हैं। नौ साल बाद किसी पाकिस्तानी नेता की भारत यात्रा को लेकर पाकिस्तान में सबसे ज्यादा सियासत गर्म हुई है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी से जुड़े नेताओं ने पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवालिया निशान लगाने शुरू कर दिए। पाकिस्तान के नेताओं ने बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा को अपनी बदहाल विदेश नीति करार दिया। पीटीआई के नेता फवाद चौधरी ने ट्वीट करते हुए भुट्टो की यात्रा का न सिर्फ विरोध किया, बल्कि पाकिस्तान की सरकार को मोदी के प्यार में पड़े होने तक की बात कह दी। विदेशी मामलों के जानकार और वरिष्ठ राजनयिक रहे पीएन बसु कहते हैं कि इस वक्त पाकिस्तान में जो हालात हैं, उसमें उनके पास दुनिया के दूसरे मुल्कों से मदद मांगने के सिवा और कोई रास्ता ही नहीं बचता है। ऐसे में बिलावल भुट्टो ने सीधे तौर पर न सही, लेकिन अपरोक्ष रूप से भारत से भी किसी न किसी उम्मीद की आस लेकर ही पहुंचे हैं।
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बिलावल भुट्टो की इस यात्रा को विदेशी मामलों के जानकार कई और नजरियों से भी देखते हैं। पाकिस्तान समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों में अपनी सेवाएं देने वाले वरिष्ठ राजनयिक रहे अरुण सिन्हा बताते हैं कि पाकिस्तान की आर्थिक रूप से कमर बहुत लंबे वक्त से टूटी हुई है। शुरुआत में तो पाकिस्तान को लग रहा था कि चीन उसकी हर स्तर पर मदद करता रहेगा। चीन ने अपने हितों को साधते हुए पाकिस्तान में जिस तरीके से आर्थिक निवेश किया और उनकी मदद का भरोसा दिलाया, उसके उलट पाकिस्तान के हालात सुधरने की जगह बिगड़ते चले गए। श्रीलंका में भी चीन ने कुछ इसी तरीके के निवेश के साथ उसकी पूरी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी थी। सिन्हा कहते हैं कि पाकिस्तान भी कमोबेश श्रीलंका की स्थिति में जाने की कगार पर पहुंच चुका है। ऐसे में अब पाकिस्तान को अमेरिका जैसे देशों से बड़ी मदद मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को कोई भी बड़ी मदद का भरोसा नहीं दिया है। पाकिस्तान की पूर्व मंत्री शिरीन मजारी कहती हैं कि अमेरिका को खुश करने के लिए विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत जाने का प्लान बनाया। उनका कहना है कि अमेरिका और भारत के रिश्ते इतने मधुर हैं कि अगर पाकिस्तान अमेरिका के किसी दोस्त के साथ अपने रिश्ते मजबूत करेगा, तो संभव है पाकिस्तान की मदद करने के लिए अमेरिका कुछ कदम आगे आ जाए।
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हालांकि पाकिस्तान की सियासत में चल रहे हैं इस तरह के तमाम बयानों और उठापटक के बीच रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि गोवा में चल रही यह बैठक बहुपक्षीय है। इसलिए पाकिस्तान कि अगर कोई मंशा द्विपक्षीय वार्ता को लेकर रही भी होगी, तो गोवा की बैठक में बहुपक्षीय बैठक के साथ उनके वह अरमान धरे के धरे रह गए होंगे। रक्षा मामलों के जानकार रिटायर्ड कर्नल जितेंद्र सारंगी कहते हैं कि टेरर और टॉक तो साथ-साथ हो ही नहीं सकती। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि शंघाई सहयोग संगठन का अध्यक्ष भारत है। इसलिए सभी देशों को आमंत्रित तो किया ही जाना था।
इमरान ने की थी भारत की तारीफ
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद शारिक ने अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि बिलावल भुट्टो के भारत जाने को लेकर यहां विवाद तो चल रहा है, लेकिन असलियत में विवाद करने वाले लोग भी वही हैं, जो पहले इसी नीति का समर्थन करते हैं। शारिक कहते हैं कि जब रूस और यूक्रेन का युद्ध हुआ, तो पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें इस पूरे मामले में भारत की तरह ही न्यूट्रल रहना चाहिए। लेकिन पाकिस्तान में एक बड़ा राजनीतिक धड़ा अमेरिका को सपोर्ट करता रहा और रूस का विरोध करना शुरू कर दिया। नतीजतन बाद में पाकिस्तान की सियासत में इतने बड़े उलटफेर हो गए, जिसकी पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी को भी भनक नहीं लगी। अब जब बिलावल भुट्टो भारत पहुंचे हैं, तो भी इमरान खान की पुरानी सत्ताधारी पार्टी के लोग विरोध कर रहे हैं। जबकि उनकी ही पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इसका समर्थन भी किया है।
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार शारिक का कहते हैं कि पाकिस्तान इस वक्त अपनी मुफलिसी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। पाकिस्तान को इस बात का अंदाजा है कि भारत और अमेरिका के मजबूत रिश्ते हैं। वह कहते हैं कि पाकिस्तान सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि अमेरिका के दोस्तों से भी मधुर संबंध बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। भारत भी उसी की सूची में शामिल है। वह कहते हैं कि पाकिस्तान जब दुनिया की अलग-अलग देशों के संगठनों के साथ ऐसे आयोजन में शिरकत करेगा तो संभव है उसकी छवि भी सुधरे और पाकिस्तान की गरीबी को दूर करने के लिए अमेरिका जैसे कुछ देश आगे आ सकते हैं।