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कोलकाता के वैज्ञानिकों ने बनाई नैनो मेडिसिन, दावा- कोरोना के उपचार में साबित हो सकती है रामबाण
Fri, 01 May 2020 04:49 AM IST
Rajeev Rai
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Fri, 01 May 2020 04:49 AM IST
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कोविड मरीजों के लिए नैनो मेडिसिन (सांकेतिक)
- फोटो : social media
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सुभाष चंद्र बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेसज कोलकाता (एसएनबीएनसीबीएस) के वैज्ञानिकों ने बहुत सुरक्षित और प्रभावी नैनोमेडिसिन विकसित करने में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोना के उपचार में रामबाण साबित हो सकती है।
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नैनोमेडिसिन स्थिति के अनुसार हमारे शरीर में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पेसीज (आरओएस) को घटा और बढ़ा सकने में सक्षम है। शरीर के भीतर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बदलने के गुणों के चलते कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में यह सहायक सिद्ध हो सकती है। जानवरों पर इस दवा के सफल प्रयोग के बाद अब इसे मनुष्यों पर जांचने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इससे कोरोना संक्रमण रोकने में इसके प्रयोग की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
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इस दवा को बनाने में नींबू जैसे अर्क और मैगनीज साल्ट के नैनोपार्टिकल्स का प्रयोग किया गया है। इसके तहत नैनोटेक्नॉलाजी के विभिन्न तरीकों का प्रयोग करते हुए मैगनीज और साइट्रेट का महत्वपूर्ण मिश्रण की मदद से नैनोमेडिसिन का निर्माण किया गया है।
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पशुओं में परीक्षण के दौरान नैनोमेडिसिन द्वारा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की बढ़ोतरी सराहनीय रही है। ऐसे में नवजात बच्चों में पीलिया सहित कई रोगों के उपचार में इसका इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है। चूहों पर किए गए एक परीक्षण में नैनोमेडिसिन सुरक्षित एवं त्वरित पाया गया। इसके प्रयोग के महज ढाई घंटे के भीतर पीलिया का स्तर नीचे चला गया। इससे यह स्तनपायियों में रिएक्टिव आक्सीजन स्पेसीज( आरओएस) को नियंत्रित वृद्धि की यही क्षमता कोरोना सहित वायरस संक्रमणों को नियंत्रित करने में नैनोमेडिसन के प्रयोग की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करता है।