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Supreme Court Updates: पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची पर घमासान, एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Tue, 13 Jan 2026 12:26 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 13 Jan 2026 12:26 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चुनाव आयोग से एक सप्ताह में जवाब मांगा है। टीएमसी सांसदों ने प्रक्रिया को मनमाना और असंवैधानिक बताया। सुप्रीम कोर्ट ने कई और मामले में भी सुनवाई की है।  

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SC Updates supreme court examines legal immunity granted to Election Commissioners issues notice to Centre EC
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने प.बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद डेरेक ओब्रायन और डोला सेन ने अपनी याचिकाओं में एसआईआर प्रक्रिया को मनमाना, असांविधानिक और प्रक्रियागत रूप से दोषपूर्ण होने का आरोप लगाया है।
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चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी। टीएमसी सांसद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि आयोग एसआईआर से जुड़े निर्देश लिखित आदेशों के बजाय व्हाट्सएप और वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसे अनौपचारिक माध्यमों से जारी कर रहा है। बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मौखिक या डिजिटल निर्देश देना न केवल कानून के विपरीत है, बल्कि इससे जवाबदेही भी खत्म हो जाती है।
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याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार मतदाताओं को भी शारीरिक रूप से उपस्थित होकर सुनवाई में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसकी वजह से उन्हें भारी कठिनाइयों और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। टीएमसी सांसदों ने शीर्ष अदालत से यह भी आग्रह किया है कि 15 जनवरी 2026 को दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए और व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों से जारी सभी निर्देशों को अवैध घोषित किया जाए।
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आयुष डॉक्टरों को पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर की मांग पर केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने कानून, स्वास्थ्य और आयुष मंत्रालयों से एक याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें एलोपैथिक डॉक्टरों की तरह आयुष डॉक्टरों को भी कानून के तहत पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। जनहित याचिका में 1954 के एक कानून की अनुसूची की समीक्षा और उसे अपडेट करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। इस कानून का मकसद वैज्ञानिक विकास के अनुसार कुछ मामलों में दवाओं के विज्ञापन को नियंत्रित करना है।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता विधि छात्र व बेटे नितिन उपाध्याय की ओर से पेश वकील अश्विनी उपाध्याय की दलीलों पर गौर किया और याचिका पर नोटिस जारी किया।सीजेआई ने अश्विनी उपाध्याय से पूछा, क्या यह आपका बेटा है? इस पर वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जी। इस पर पीठ ने कहा कि हमने सोचा था कि उसे कोई गोल्ड मेडल वगैरह मिलेगा, लेकिन अब वह पीआईएल दाखिल कर रहा है। तुम अब पढ़ाई क्यों नहीं करते?...नोटिस जारी करो। सिर्फ तुम्हारे बेटे के लिए, ताकि वह अच्छे से पढ़ाई करे।

याचिका में यह निर्देश देने की मांग की गई है कि आयुष डॉक्टरों को भी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर के तौर पर ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवर्टाइजमेंट्स) कानून, 1954 की धारा 2(cc) के तहत शामिल किया जाए। इस कानून का मकसद कुछ मामलों में दवाओं के विज्ञापन को नियंत्रित करना है और जादुई गुणों का दावा करने वाली दवाइयों के कुछ खास मकसद से किए जाने वाले विज्ञापन पर रोक लगाना है।

बीसीसीआई से जुड़ने पर लगी रोक हटाने के लिए अनुराग पहुंचे शीर्ष कोर्ट
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उस पुराने आदेश में संशोधन की मांग की है, जिसमें उन्हें बीसीसीआई के कामकाज से दूर रहने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश 2 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष की याचिका पर दो हफ्ते बाद सुनने पर सहमति जताई। अनुराग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि 2017 का सीज एंड डिसिस्ट आदेश उन्हें सुने बिना पारित किया गया था।

चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी प्रतिरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी प्रतिरक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है, हालांकि संबंधित प्रावधान पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ ने की, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाला बाघची शामिल थे। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए सवालों की जांच की जरूरत है।
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