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Supreme Court: कर्नाटक हिजाब मामले के लिए तीन न्यायाधीशों की बेंच का हो सकता है गठन, शीर्ष कोर्ट ने कही यह बात
Mon, 23 Jan 2023 10:01 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 23 Jan 2023 10:01 PM IST
सार
शीर्ष अदालत की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने बीते साल 13 अक्टूबर को हिजाब विवाद में विरोधी फैसले सुनाए थे। बाद में उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया था कि कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध से शुरू हुए विवाद में फैसला सुनाने के लिए एक उपयुक्त पीठ का गठन किया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : ANI
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विस्तार
कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में हिजाब पर लगाए गए प्रतिबंध मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने कहा कि वह कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध से जुड़े मामले में फैसला सुनाने के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ गठित करने पर विचार करेगा।
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सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन के साथ जेबी पारदीवाला की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों पर गौर करते हुए यह टिप्पणी की। वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि राज्य में 6 फरवरी से कुछ कक्षाओं के लिए होने वाली प्रायोगिक परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए मामले में एक अंतरिम आदेश की जरूरत है।
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वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि यह हिजाब का मामला है। छात्राओं की छह फरवरी 2023 से प्रैक्टिकल परीक्षाएं हैं। इन लड़कियों ने उन कॉलेजों को छोड़ दिया था जहां उन्हें हिजाब की अनुमति नहीं थी। ऐसे में उन्हें एक साल का नुकसान हुआ है। अब प्रैक्टिकल परीक्षाएं सरकारी स्कूलों में होनी है। ऐसे में इस मामले को अंतरिम आदेश के लिए सूचीबद्ध किए जाने की जरूरत है, ताकि वे परीक्षा में शामिल हो सकें।
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इस पर सीजेआई ने कहा कि वे इसकी जांच करेंगे। यह तीन जजों की बेंच का मामला है। हम इसके लिए एक तारीख तय करेंगे। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने बीते साल 13 अक्टूबर को हिजाब विवाद में विरोधी फैसले सुनाए थे। बाद में उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया था कि कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध से शुरू हुए विवाद में फैसला सुनाने के लिए एक उपयुक्त पीठ का गठन किया जाए।
अपने फैसलों पर क्या बोले थे जज?
अब रिटायर हो चुके न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 मार्च के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज कर दिया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या कॉलेज मैनेजमेंट छात्रों के यूनिफॉर्म पर या हिजाब पहनने को लेकर कोई फैसला कर सकता है? क्या सरकारी आदेश शिक्षा तक पहुंच के उद्देश्य को पूरा करता है? मेरे हिसाब से जवाब अपीलकर्ता के खिलाफ है।
वहीं, पीठ के दूसरे सदस्य सुधांशु धूलिया की राय अलग रही थी। उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए कहा कि विवाद के लिए आवश्यक धार्मिक अभ्यास की पूरी अवधारणा की आवश्यक नहीं थी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने गलत रास्ता अपनाया। जस्टिस धूलिया ने कहा है 'यह दरअसल पसंद और अनुच्छेद- 14 और 19 का मामला है। यह पसंद का मामला है, न ज्यादा और न ही कम।' जस्टिस धूलिया ने कहा कि उनके मन में सबसे बड़ा सवाल बालिकाओं की शिक्षा को लेकर था।
क्या था कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला?
गौरतलब है कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहन कर आने पर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के तर्क 10 दिन तक सुनने के बाद 22 सितंबर को सुनवाई पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।