फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC takes note of delay in uploading of HC order, directs seizure of steno book

Supreme Court: वेबसाइट पर देरी से आदेश अपलोड होने पर 'सुप्रीम' सख्ती, HC के अग्रिम जमानत आदेश पर उठे सवाल

Sun, 31 Aug 2025 03:40 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 31 Aug 2025 03:40 PM IST
सार

आमतौर पर कोर्ट के आदेश तुरंत वेबसाइट पर अपलोड किए जाते हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और पक्षकारों को पता चल सके कि फैसला क्या है। आदेश अपलोड करने में हुई इतनी लंबी देरी से अदालत ने यह संकेत दिया है कि मामला साधारण चूक नहीं, बल्कि गंभीर जांच का विषय है।

विज्ञापन
SC takes note of delay in uploading of HC order, directs seizure of steno book
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक आदेश को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। मामला है एक अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश का, जिसे हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को पारित किया था। लेकिन यह आदेश 20 अगस्त तक हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड ही नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने इस देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि संबंधित जज के सेक्रेटरी की स्टेनो बुक (टाइपिंग रजिस्टर) जब्त की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आदेश वास्तव में कब टाइप हुआ और कब उसमें सुधार किया गया।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - Telangana: पिछड़ा वर्ग के आरक्षण पर सीएम रेवंत रेड्डी और बीआरएस आमने-सामने, विधानसभा में हुई गरमा गरम बहस
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां
जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस विजय विष्णोई की बेंच ने कहा कि पहली नजर में यह मामला संदिग्ध लग रहा है। कोर्ट ने पाया कि जब 20 अगस्त को सुनवाई हुई थी, तब आदेश तक वेबसाइट पर मौजूद नहीं था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से रिपोर्ट मांगी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


रिपोर्ट के अनुसार, रजिस्ट्रार जनरल ने 22 अगस्त को संबंधित जज के सेक्रेटरी से स्पष्टीकरण मांगा। उसी दिन सेक्रेटरी ने जवाब दिया और उसी दिन आदेश वेबसाइट पर अपलोड भी हो गया। सेक्रेटरी ने अपने जवाब में सिर्फ इतना कहा कि जज 1 अगस्त से 20 अगस्त तक कुछ मेडिकल प्रक्रिया और सर्जरी से गुजर रहे थे। लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि आदेश आखिरकार कब वेबसाइट पर डाला गया।


सुप्रीम कोर्ट का संदेह
पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि आदेश 31 जुलाई को पारित ही नहीं हुआ था, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद इसे तैयार किया गया और अपलोड किया गया। इसीलिए अदालत ने आदेश दिया कि जज के सेक्रेटरी की स्टेनो बुक जब्त की जाए। पता लगाया जाए कि आदेश किस दिन टाइप हुआ और कंप्यूटर पर कब संशोधित किया गया। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) से आदेश के टाइप और अपलोडिंग की रिपोर्ट ली जाए और इसे हलफनामे के साथ सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाए।

यह भी पढ़ें - Dharmasthala Row: 'SIT को जांच के लिए पूरी स्वतंत्रता, NIA की जरूरत नहीं', धर्मस्थल मामले में बोले सिद्धारमैया

याचिकाकर्ता को बड़ी राहत
यह पूरा मामला एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत से जुड़ा है, जिसकी याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि चार हफ्तों तक मामले की अगली सुनवाई तक पुलिस कोई कठोर कदम (जैसे गिरफ्तारी) नहीं उठाएगी, बशर्ते याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करता रहे। इस मामले में हरियाणा सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed