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Supreme Court: दुष्कर्म के बाद छात्रा की हत्या का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी के मृत्युदंड पर लगाई रोक

Tue, 03 Dec 2024 07:00 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 03 Dec 2024 07:00 PM IST
सार

देश की सर्वोच्च अदालत ने झारखंड की राजधानी में इंजीनियरिंग छात्रा के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या करने के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को सुनाई गई मौत की सजा पर मंगलवार को रोक लगा दी। जानकारी के मुताबिक आरोपी ने दुष्कर्म के बाद जिंदा जलाकर छात्रा की हत्या की थी।

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SC stays death penalty of man convicted of murder of teen student in Jharkhand
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने झारखंड की राजधानी रांची में इंजीनियरिंग छात्रा के दुष्कर्म और हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा पर मंगलवार को रोक लगा दी। मामले में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, पंकज मिथल और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने राहुल कुमार को दोषी ठहराने और मौत की सजा सुनाने वाले ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड की अनुवादित प्रति तलब की। पीठ ने निर्देश दिया कि 'दी गई मौत की सजा पर रोक रहेगी। रजिस्ट्री को सॉफ्ट कॉपी के साथ ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय से रिकॉर्ड हासिल करने होंगे।' बता दें कि 9 सितंबर को झारखंड उच्च न्यायालय ने बिहार के नवादा जिले के रहने वाले कुमार उर्फ राहुल राज को ट्रायल कोर्ट की तरफ से सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टि की।
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हाईकोर्ट के बाद आरोपी ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आरोपी ने शीर्ष न्यायालय का रुख किया, जिसने मृत्युदंड याचिका की सुनवाई के पहले दिन ही मृत्युदंड पर रोक लगा दी और अधीनस्थ न्यायालयों से रिकॉर्ड तलब किए हैं। इस 15 दिसंबर, 2016 को हुई वारदात में आरोपी ने युवती के साथ पहले दुष्कर्म किया फिर उसका गला घोंटा और फिर उसे आग लगा दी थी। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर, 2019 में आरोपी को मौत की सजा सुनाई।
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युवती की हत्या बेहद बर्बर तरीके से की गई- हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाली 19 साल की एक होनहार युवती की हत्या बेहद बर्बर तरीके से की गई... यह बात पीड़िता के शव का पोस्टमार्टम करने के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने वाले डॉक्टरों की तरफ से विधिवत प्रमाणित पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साबित होती है। अपीलकर्ता की तरफ से किए गए अपराध को 'घृणित कृत्य' करार देते हुए हाई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302 के तहत ट्रायल कोर्ट की तरफ से दी गई मौत की सजा की पुष्टि की। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि वारदात के दौरान आरोपी पीड़िता का गला घोंटने के लिए केबल कॉर्ड और बिजली के तार के साथ-साथ उसे जलाने के लिए लुब्रिकेंट ऑयल भी लेकर आया था।
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बिना किसी दुश्मनी के किया गया वारदात- हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने ये भी उल्लेख किया कि, गला घोंटना इतना तीव्र था कि केबल कॉर्ड और बिजली का तार पीड़िता के गले में धंस गया। इसके बाद, उसने शरीर पर चिकनाई वाला तेल डाला और उसे आग लगा दी। यह सब एक असहाय पीड़िता पर इस अपीलकर्ता की तरफ से किया गया, जिसके साथ पीड़िता की कोई पिछली दुश्मनी नहीं थी, और इस कृत्य के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। उच्च न्यायालय ने कहा, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पीड़िता के साथ हिंसक बलात्कार और उसका गला घोंटकर मार डालने की पुष्टि की।


'शैतानी ढंग से योजनाबद्ध और बेरहमी से किया गया अपराध'
अदालत ने कहा, यह ऐसा मामला नहीं है जहां अपराध अचानक आवेश में आकर हुआ हो, बल्कि यह शैतानी ढंग से योजनाबद्ध और बेरहमी से अंजाम दिया गया था। साक्ष्य से पता चलता है कि अपीलकर्ता ने पीड़िता का पीछा किया, उसके घर में किराए पर कमरा लेने का प्रयास किया, और उसके बाद, पास के एक मंदिर परिसर में एक कमरे में रहा। 
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