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सुप्रीम कोर्ट ने पांच समुदायों को अल्पसंख्यक दर्जे की मांग वाली याचिका पर केंद्र को भेजा नोटिस

Tue, 09 Feb 2021 03:17 PM IST
स्नेहा बलूनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्नेहा बलूनी Updated Tue, 09 Feb 2021 03:17 PM IST
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sc sought govt reply on plea seeking minority status for hindus in states and union territory transfer of cases from hc
सर्वोच्च न्यायालय (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पांच समुदायों के अल्पसंख्यक दर्जे के खिलाफ अलग-अलग उच्च न्यायालय में विचाराधीन मामलों को एक जगह स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में पांच समुदायों- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी को अल्पसंख्यक बताया गया है। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने यह याचिका दाखिल की है।

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मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने गृह मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। दिल्ली, मेघालय और गुवाहाटी में उच्च न्यायालयों को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 की धारा 2 (सी) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले सभी मामलों को एक ही जगह स्थानांतरित किया जाए। इसके तहत 23 अक्तूबर 1993 को अधिसूचना जारी की गई थी।
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अधिसूचना में पांच समुदायों को देश भर में अल्पसंख्यक घोषित किया गया था। ट्रांसफर याचिका में आरोप लगाया गया है कि पंजाब और जम्मू और कश्मीर में सिखों की बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यकों का लाभ उठा रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन मामले में उपाध्याय की तरफ से उपस्थित हुए।
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अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि मुकदमों की बहुलता और परस्पर विरोधी विचारों से बचने के लिए, स्थानांतरण याचिका को शीर्ष अदालत के समक्ष स्थानांतरित कर दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि अल्पसंख्यक लाभों का महत्वहीन और तर्कहीन प्रसार धर्म, जाति, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव के निषेध के मूल अधिकार का उल्लंघन करता है।


राजद्रोह कानून को गैर संवैधानिक घोषित करने की मांग खारिज
उच्चतम न्यायालय ने राजद्रोह से संबंधित कानून को गैर संवैधानिक घोषित करने की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि धारा 124ए का दुरुपयोग हो रहा है। यह कानून अंग्रेजों द्वारा बनाया गया है। याचिका में शीर्ष अदालत के वकील आदित्य रंजन, वरुण कुमार और अन्य की ओर से दायर अर्जी में कहा गया है कि आईपीसी की धारा-124ए के दुरुपयोग के मामले बढ़े हैं।

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