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जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदियों की संख्या पर भड़का SC, कहा- ये व्यक्ति बंदी हैं जानवर नहीं

Sat, 31 Mar 2018 12:23 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sat, 31 Mar 2018 12:23 AM IST
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SC says, more than the capacity of prisoners in the jails, this is Person is not animal
सुप्रीम कोर्ट
देश की 1300 से अधिक जेलों में 600 प्रतिशत तक अधिक बंदी रखे जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को बुरी तरह फटकार लगाई। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, जेल में बंद ये व्यक्ति बंदी हैं, जानवर नहीं। यदि आप इन्हें सही तरह से नहीं रख सकते तो हमें इन्हें छोड़ देना चाहिए। न्यायालय ने इस स्थिति को सुधारने के लिए प्रतिबद्धता की कमी पर भी नाराजगी जताई।
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जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने इस मामले में पहले दिए गए निर्णय के तहत ओवरलोड जेल की स्थिति सुधारने के लिए एक्शन प्लान अभी तक जमा नहीं कराने पर भी नाराजगी जताई और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक (जेल) को अवमानना नोटिस जारी करने की चेतावनी दी। 
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न्यायालय ने कहा, यदि हम उन्हें जेल में रख भी नहीं सकते तो सुधार पर बात करने का क्या औचित्य है? न्यायालय ने कहा, इस मामले में तैनात न्यायमित्र ने बताया है कि देश की जेलों में न्यूनतम 150 फीसदी और अधिकतम 609 फीसदी तक क्षमता से ज्यादा कैदी हैं। कोर्ट ने 6 मई, 2016 व 3 अक्टूबर 2016 को दिए अपने निर्णयों में सभी राज्यों को 31 मार्च, 2017 तक ये प्लान जमा करने को कहा था। हालांकि न्यायालय को बताया गया कि ओपन जेल तैयार करने के लिए 30 अप्रैल, 2018 तक कानून तैयार कर लिया जाएगा।
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बंदियों के भी हैं मानवीय अधिकार

SC says, more than the capacity of prisoners in the jails, this is Person is not animal
Demo Pic - फोटो : google
न्यायालय ने कहा,बंदियों के भी मानव अधिकार होते हैं और उन्हें जेल में जानवर की तरह नहीं रखा जा सकता। जेलों का ओवरलोड होना दुर्भाग्यपूर्ण है और ये पूरी तरह से राज्य सरकारों का बंदियों के मानव अधिकारों के प्रति लापरवाही भरा रवैया है। साथ ही अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटियों (यूटीआर) के भी अपनी जिम्मेदारी सही तरह से नहीं निभाने को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दो सप्ताह में यूटीआर के लिए राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) से परामर्श लेकर काम करने का स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रिया तैयार करने का आदेश दिया है।

एक नजर में भारतीय जेलें

कुल जेल    1401
बंदी क्षमता    366781
मौजूद बंदी    419623
पुरुष बंदी    401789
महिला बंदी    17834
सजायाफ्ता    334168
विचाराधीन    281076
अन्य              3379
जेल कर्मचारी    77230
खाली पद    24588

बंदी संख्या में शीर्ष-5
राज्य             बंदी
उत्तर प्रदेश    88747
मध्य प्रदेश    38458
महाराष्ट्र    29657
बिहार    28418
पंजाब    23645

क्षमता से ज्यादा भार

राज्य        ओवरलोड (प्रतिशत)
छत्तीसगढ़    233.9 
दिल्ली          226.9
(आंकड़े नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2016 में आई आखिरी रिपोर्ट के अनुसार)
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