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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया हाई कोर्ट का आदेश, संपत्ति हड़पने के मामले में बहाल की एफआईआर

Wed, 18 Mar 2026 08:51 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Wed, 18 Mar 2026 08:51 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए जमीन हड़पने और जालसाजी से जुड़े मामले की एफआईआर बहाल कर दी। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले एफआईआर रद्द करना गलत था, क्योंकि गंभीर आरोपों की जांच जारी थी। क्या था पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-

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SC restores FIR in land grab and forgery case, sets aside Himachal Pradesh HC verdict
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के एक आदेश को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने शिमला जिले में करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति हड़पने के आरोप वाली प्राथिमिकी को खारिज कर दिया गया था। इस प्राथमिकी में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे।
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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बुधवार को दिए गए फैसले में शिकायतकर्ता शरला बाजलियल और हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से दायर अलग-अलग अपीलों को स्वीकार किया। ये अपीलें जमीन हड़पने के मामले में प्राथमिकी रद्द किए जाने के खिलाफ दायर की गई थीं।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमने  पाया है कि हाई कोर्ट ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए शुरुआती चरण में ही प्राथमिकी को रद्द कर दिया, जबकि जांच पूरी तरह चल रही थी और अहम सबूत अभी जुटाए जाने बाकी थे।  जस्टिस मेहता ने अपने फैसले में कहा कि हाई कोर्ट की ओर से प्राथमिकी रद्द करना पूरी तरह अनुचित था। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में जालसाजी के स्पष्ट आरोप थे और जांच एजेंसी ने 11 विवादित दस्तावेजों की हैंडराइटिंग विशेषज्ञ से जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमारा स्पष्ट मत है कि हाई कोर्ट ने जल्दबाजी में प्राथमिकी से जुड़े मामले की कार्यवाही समाप्त कर दी, जबकि शिकायतकर्ता ने धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेरफेर, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात जैसे स्पष्ट आरोप लगाए थे। 

अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह जांच जल्द पूरी करे और संबंधित निचली अदालत में आरोपपत्र दाखिल करे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में की गई टिप्पणियां केवल इस अपील के निर्णय तक सीमित हैं और मामले के आगे के चरणों में पक्षों के अधिकारों और बचाव पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

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शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए हैं?
आरोप है कि बलदेव ठाकुर, दलजीत सिंह और जीनपुरी कमसुओन ने मिलकर शिकायतकर्ता के पिता दिवंगत जीबी बाजलियल की पैतृक संपत्ति और संपत्तियों को धोखाधड़ी से हड़पने की साजिश रची। अगस्त 2022 में शिमला में राज्य सीआईडी की ओर से दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ता के पिता की पत्नी की मृत्यु के बाद उनकी बिगड़ती मानसिक और शारीरिक स्थिति का फायदा उठाया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें बहला-फुसलाकर पारिवारिक संपत्ति और बैंक की रकम अपने नाम करवा ली। प्राथमिकी में यह भी आरोप है कि बाजलियल के बैंक खातों से करीब 1.18 करोड़ रुपये बिना किसी वैध लेन-देन के दलजीत सिंह को ट्रांसफर किए गए।

इसके अलावा, 2017 में लगभग 49 बीघा पारिवारिक जमीन को ठाकुर को 3.9 करोड़ रुपये में बेचा गया, जो कथित तौर पर सर्किल रेट से काफी कम कीमत पर था। जांच में बाद में बिक्री मूल्य और सरकारी सर्किल रेट के बीच अंतर पाया गया, जिससे कम मूल्यांकन और संभावित धोखाधड़ी के संकेत मिले। हाई कोर्ट ने जनवरी 2024 में एफआईआर को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि आरोपों में धोखाधड़ी या जालसाजी के जरूरी तत्व स्पष्ट नहीं हैं और वे केवल अनुमान पर आधारित लगते हैं।

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