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Supreme Court: बिना मुहर लगे मध्यस्थता समझौते वाले आदेश पर पुनर्विचार को लेकर फैसला सुरक्षित; जानें पूरा मामला

Thu, 12 Oct 2023 08:50 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 12 Oct 2023 08:50 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता समझौते से जुड़े एक मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात जजों की पीठ ने पुनर्विचार की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा है।

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SC reserves verdict unstamped arbitration agreements cji chandrachud led seven judges bench
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले पर दोबारा विचार की अपील की गई है। अब मध्यस्थता से जुड़े अहम मामले पर सात जजों की पीठ को फैसला सुनाना है। अदालत के सामने सवाल है कि क्या ऐसे समझौते जिसमें मुहर नहीं लगे हैं? उन्हें भी कानूनी तौर पर लागू किया जा सकता है। कोर्ट को अपने आदेश की शुद्धता पर दोबारा विचार करना है।
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मध्यस्थता समझौते पर पांच जजों की पीठ का फैसला
गुरुवार को शीर्ष अदालत ने दलीलों को सुनने के बाद बिना मुहर लगे मध्यस्थता समझौतों पर आदेश की शुद्धता पर पुनर्विचार मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने इस मामले में पारित आदेश में कहा था कि बिना मुहर लगे मध्यस्थता समझौते कानून में लागू नहीं किए जा सकते। पुनर्विचार की अपील पर फैसला सुरक्षित रखने वाली मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने डेरियस खंबाटा और श्याम दीवान सहित विभिन्न वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुनीं।
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मध्यस्थता के मकसद पर सीजेआई की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलों में खंबाटा ने कहा कि स्टांप या स्टांप की कमी एक दोष है जिसका इलाज संभव है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होनी चाहिए जहां पार्टियों के बीच मध्यस्थता समझौते का उद्देश्य विफल हो जाए। दलीलों को सुनने के बाद सीजेआई ने कहा कि पार्टियों को मध्यस्थता के लिए भेजने का पूरा उद्देश्य "अधूरा है और उद्देश्य विफल हो गया है।"
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सात जजों की पीठ में कौन शामिल हैं?
पीठ ने कहा, "अगर मध्यस्थता समझौतों में खामियां ठीक होने की संभावना है तो आप इसे कैसे खारिज कर सकते हैं?" बता दें कि सीजेआई की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई, सूर्यकांत, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा भी शामिल थे।

25 अप्रैल का आदेश, अब पुनिर्विचार पर फैसला सुरक्षित
इससे पहले 26 सितंबर को फैसले की शुद्धता पर पुनर्विचार करने का मुद्दा सात-न्यायाधीशों की पीठ को भेजा गया था। पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने विगत 25 अप्रैल को आदेश पारित किया था। इसी फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत पर जोर दिया गया था। अदालत ने अप्रैल के फैसले में कहा था कि एनएन ग्लोबल के मामले में बहुमत के दृष्टिकोण के बड़े प्रभावों और परिणामों को ध्यान में रखा है। हमारा विचार है कि दृष्टिकोण की शुद्धता पर पुनर्विचार करने के लिए कार्यवाही को सात-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए। 

संविधान पीठ ने आदेश में क्या कहा?
अप्रैल के फैसले में पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने 3:2 के बहुमत से आदेश पारित किया था। पीठ ने कहा था, एक ऐसा दस्तावेज जिस पर  स्टांप शुल्क लगना चाहिए, वह मध्यस्थता खंड हो सकता है। हालांकि, जिस पर मुहर नहीं लगी है, ऐसे दस्तावेजों को अनुबंध नहीं कहा जा सकता। अनुबंध अधिनियम की धारा 2(एच) के अर्थ के तहत कानूनी रूप से भी ये दस्तावेज बाध्यकारी नहीं होंगे। अनुबंध अधिनियम की धारा 2(जी) के तहत भी इसे लागू नहीं किया जा सकता।

दस्तावेजों का कानूनी अस्तित्व नहीं
अदालत के आदेश के अनुसार, "कोई बिना मुहर वाला दस्तावेज, जब उस पर मुहर लगाना जरूरी हो, अनुबंध नहीं है।" कानूनी रूप से भी ऐसे दस्तावेजों को प्रभावी नहीं माना जा सकता। इसलिए ऐसे दस्तावेजों का कानून की नजरों में भी कोई अस्तित्व नहीं रह जाता।

अदालत ने माना-मामला बेहद पेचीदा, समाधान तलाशना जरूरी
मामले से जुड़े जटिल कानूनी पहलुओं को देखते हुए मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा, अदालत का मानना है कि इस मामले को सात न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए। देश भर में मध्यस्थों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। जहां उन्हें बताया जा रहा है कि एक बिना मुहर वाला समझौता है। इस मुद्दे पर फिर से कानूनी लड़ाई का विकल्प खुला है। ऐसे में अदालत को इस पेचीदा मामले को हल करने की जरूरत है।"


फैसले में सुधार की दलील, वकील ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे एक वकील ने कहा कि पांच जजों की पीठ के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है। यह निष्कर्ष निकालना कि अगर किसी समझौते पर मुहर नहीं लगी है, तो उसका कोई अस्तित्व नहीं है, सही नहीं हो सकता।
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