फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC refuses to hear Maneka Gandhi's plea against 45-day cap for filing election petition

SC: कोर्ट का मेनका की याचिका पर सुनवाई से इनकार, चुनाव याचिका दायर करने के लिए 45 दिन की सीमा को दी थी चुनौती

Tue, 07 Jan 2025 05:58 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 07 Jan 2025 05:58 PM IST
सार

SC: शीर्ष कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी की नेता मेनका गांधी एक याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। मेनका गांधी ने चुनाव याचिका दायर करने के लिए 45 दिन की समयसीमा को चुनौती दी थी। 

विज्ञापन
SC refuses to hear Maneka Gandhi's plea against 45-day cap for filing election petition
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका दायर करने के लिए 45 दिन की समयसीमा को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि वह कानून बनाने का काम नहीं कर सकता और बाढ़ के लिए दरवाजा नहीं खोल सकता। 

विज्ञापन


हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस कोटेश्वर सिंह की बेंच ने मेनका गांधी की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में उन्होंने समाजवादी पार्टी के रामभुआल निषाद की लोकसभा चुनाव में जीत को चुनौती दी थी। निषाद ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर सीट से जीत हासिल की थी। कोर्ट ने निषाद को चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। 
विज्ञापन


45 दिन की सीमा का मामला
लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के चुनाव जीतने के बाद 45 दिन की ही समयसीमा होती है, जिसमें याचिका दायर की जा सकती है। यह नियम जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 81 में है। मेनका गांधी को निषाद से 43,174 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम इस मामले पर सुनवाई नहीं करना चाहते। हम नहीं चाहते कि हम कोई नया कानून बनाएं, क्योंकि हम ऐसे नहीं कर सकते। आप चाहते हैं कि हम 45 दिन की समयसीमा को गलत ठहराएं और इसे 60 या 90 दिन कर दें। लेकिन हम यह नहीं कर सकते। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
मेनका गांधी के वकील ने क्या दलील दी
मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि वह 1973 में हुए एक फैसले को फिर से देखने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उस फैसले में जो 45 दिन की समय सीमा तय की गई थी, वह गलत है और इसे फिर से देखा जाना चाहिए। लूथरा ने यह भी कहा कि यह समयसीमा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए समस्या हो सकती है, जिसने चार आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई हो। हालांकि, बेंच ने कहा कि किसी फैसले को गलत बताने के लिए कोर्ट में सिर्फ नागरिक अपील की जा सकती है, न कि इस तरह की याचिका। 


हाईकोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 अगस्त 2024 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी चुनाव याचिका समयसीमा से बाहर होने के कारण खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने माना था कि याचिका 45 दिन की समयसीमा के बाद दायर की गई थी, इसलिए इसे सुना नहीं जा सकता। गांधी ने आरोप लगाया था कि निषाद ने अपने पूरे आपराधिक इतिहास का खुलासा नहीं किया और 12 आपराधिक मामले उनके खिलाफ चल रहे थे। लेकिन उन्होंने केवल आठ मामलों का ही जिक्र किया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed