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BJP: 'चुनाव प्रक्रिया पर शक करने वालों को स्पष्ट संदेश', TMC की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोली भाजपा

Sat, 02 May 2026 01:39 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 02 May 2026 01:39 PM IST
सार

टीएमसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भाजपा ने निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि यह चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को वालों को स्पष्ट संदेश है। टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस पर क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-

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SC refusal to intervene into WB counting message against bid to cast doubt on poll process: BJP
भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई

विस्तार

पश्चिम बंगाल में मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मियों की तैनाती के चुनाव आयोग (ईसी) के आदेश में दखल से सुप्रीम कोर्ट के इनकार ने चुनाव प्रक्रिया पर शक पैदा करने की कोशिशों के खिलाफ एक 'स्पष्ट संदेश' दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अमित मालवीय ने शनिवार को यह बात कही। 
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शीर्ष कोर्ट ने शनिवार को कहा, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उस याचिका पर किसी और आदेश की जरूरत नहीं है, जिसमें उसने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मियों की तैनाती संबंधी चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। 
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अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
■  भाजपा नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक और कानूनी झटका देते हुए दखल देने से इनकार कर दिया है।
■  उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से बाहर रखने को चुनौती दी थी। तत्काल सुनवाई की मांग की थी।
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■  उन्होंने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई से इनकार यह स्पष्ट संदेश देता है कि मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करने या उस पर शक करने की कोशिशों को आसानी से मान्यता नहीं मिलेगी।
■  उन्होंने यह भी कहा कि यह ममता बनर्जी के लिए एक और न्यायिक झटका है।

भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने क्या कहा?
वहीं, भाजपा नेता सुुधांशु त्रिवेदी ने कहा, जिस प्रकार से तृणमूल कांग्रेस ने निराधार आरोपों को मुद्दा बनाकर सुप्रीम जाने का प्रयास किया, ये उनकी चिर-परिचित छटपटाहट और बौखलाहट का ही एक प्रमाण है। विगत 10-12 वर्षों में टीएमसी भिन्न-भिन्न स्तर के न्यायालयों में जा चुकी है और हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने भी आज स्पष्ट रूप से सांविधानिक दृष्टि से किसी चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी। उल्लेखनीय बात ये है कि श्री राम लला विराजमान के खिलाफ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का केस लड़ने वाले तमाम आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति रखने वाले और तृणमूल कांग्रेस के प्रति राजनीतिक रूप से अभिभूत रहने वाले कपिल सिब्बल की याचिका आज पूरी तरह खारिज कर दी गई। 

त्रिवेदी ने आगे कहा, उनके मन में जो सवाल उठता था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर भरोसा नहीं है, राज्य सरकार के कर्मचारियों पर भरोसा है। तो मैं ममता बनर्जी से कहना चाहता हूं कि आज भरोसे का सवाल आपके खुद के ऊपर है। जब आईपैक के ऊपर छापेमारी हुई, तो पहली बार ऐसा हुआ कि कोई मुख्यमंत्री स्वयं वहां पहुंच गई। इसका मतलब अपनी पुलिस और राज्य सरकार की  एजेंसी पर भरोसा नहीं था। वह वहां पर खुद अंदर गईं। अर्थात उनको खुद के निजी कर्मचारियों पर भी भरोसा नहीं था। उन्होंने खुद उठाकर वो हरे रंग की फाइल हाथ में रखी। इसका मतलब उन्हें अपने किसी निजी सहयोगी पर भी भरोसा नहीं था। तो जब तृणमूल कांग्रेस को अपनी ही सरकार और अपने कर्मचारियों पर भरोसा नहीं है तो यह इसलिए है क्योंकि जनता का भरोसा अब पूरी तरह उठ चुका है। 

मालवीय की टिप्पणी पर टीएमसी की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर क्या कहा?
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने कहा, चुनाव आयोग को मतगणना कर्मियों को चुनने का अधिकार है और 13 अप्रैल का उसका आदेश गलत नहीं कहा जा सकता।

ये भी पढ़ें: 'चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार, नए आदेश की जरूरत नहीं'; टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका


चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने कहा कि सर्कुलर में साफ है कि केंद्रीय और राज्य सरकारी कर्मचारियों का मिश्रण होगा और तृणमूल कांग्रेस की किसी गड़बड़ी की आशंका गलत है। आयोग ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सर्कुलर को पूरी तरह लागू किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में हुआ था। मतगणना चार मई को होगी। इससे पहले 30 अप्रैल को कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि केंद्रीय और सरकारी कर्मचारियों को मतगणना में नियुक्त करने के चुनाव आयोग का फैसला गैरकानूनी नहीं है। 

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