Supreme Court: ED की शक्तियों को बरकरार रखने वाले 2022 के फैसले के खिलाफ याचिकाएं, तीन जजों की पीठ पुनर्गठित
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारों से जुड़े एक बड़े और विवादास्पद मामले में फिर से सुनवाई करने का फैसला किया है। इस सिलसिले में अदालत ने तीन जजों की नई बेंच बना दी है। यह बेंच अब 7 मई को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जिनमें 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यह भी पढ़ें - मुर्शिदाबाद हिंसा: 'बंगाल के सामने कट्टरपंथ और उग्रवाद की दोहरी चुनौती', राज्यपाल ने MHA को सौंपी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में ईडी के अधिकारों को ठहाराया था सही
6 मार्च को यह मामला गलती से दो जजों की बेंच के सामने आ गया था। उस समय न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वकीलों को भरोसा दिया था कि जल्द ही तीन जजों की नई बेंच इस पर सुनवाई करेगी। बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2022 में ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) मामलों में गिरफ्तारी, संपत्ति अटैच करने, तलाशी और जब्ती करने के अधिकारों को सही ठहराया था।
'ईसीआईआर को एफआईआर के बराबर नहीं'
हालांकि, अगस्त 2022 में कोर्ट ने इस फैसले की समीक्षा के लिए दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि दो अहम मुद्दे — ईडी की शिकायत रिपोर्ट (ईसीआईआर) न देना और आरोपी को पहले से ही दोषी मान लेना — पर फिर से विचार करने की जरूरत है। कोर्ट ने तब कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग दुनियाभर में वित्तीय व्यवस्था के लिए खतरा है और इसे साधारण अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ईडी अधिकारी पुलिस अधिकारी नहीं माने जाते और ईसीआईआर को एफआईआर के बराबर नहीं माना जा सकता।
यह भी पढ़ें - Assam: महिलाओं पर टिप्पणी कर घिरे CM हिमंत सरमा; महिला कांग्रेस ने खोला मोर्चा, बोलीं- माफी मांगें मुख्यमंत्री
200 याचिकाओं में PMLA के प्रावधानों को दी गई थी चुनौती
इस फैसले में कहा गया था कि हर मामले में आरोपी को ईसीआईआर की कॉपी देना जरूरी नहीं है। गिरफ्तारी के समय ईडी की तरफ से गिरफ्तारी के कारण बता देना ही पर्याप्त है। यह फैसला उन 200 से ज्यादा याचिकाओं पर आया था, जिनमें लोगों और संस्थाओं ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून (पीएमएलए) के कई प्रावधानों को चुनौती दी थी। विपक्ष भी अक्सर इस कानून को सरकार द्वारा अपने विरोधियों को निशाना बनाने का हथियार बताता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस कानून के तहत गिरफ्तारी और जमानत की शर्तें सख्त हैं लेकिन यह उचित है और इसमें कोई मनमानी या अन्याय नहीं है। अब देखना होगा कि नई बेंच इस फैसले पर क्या राय देती है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.