SC: हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को राहत, मणिपुर में दर्ज शिकायतों पर दो सप्ताह के लिए सुरक्षा प्रदान की
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाउजिंग को उचित उपाय के लिए सक्षम अदालत तक पहुंचने की सुविधा प्रदान करने का आदेश देते हुए कहा कि आज से दो सप्ताह तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
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हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ खाम खान सुआन हाउजिंग (Dr Kham Khan Suan Hausing) को सुप्रीम कोर्ट से फौरी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि हिंसाग्रस्त मणिपुर में दर्ज दो शिकायतों पर हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर खाम खान सुआन हाउजिंग के खिलाफ दो सप्ताह तक कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। हाउजिंग पर एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने मणिपुर में धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर कृत्य किया, वहीं दूसरी शिकायत राज्य के मतदाता के रूप में नामांकन में कथित गलत कार्य के संबंध में है।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाउजिंग को उचित उपाय के लिए सक्षम अदालत तक पहुंचने की सुविधा प्रदान करने का आदेश देते हुए कहा कि आज से दो सप्ताह तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। पीठ दोनों शिकायतों में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करने वाली प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
हाउजिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि उनके खिलाफ दो मामले दायर किए गए हैं और इंफाल की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने उनमें से एक में मामले में उन्हें समन भी जारी किया है।
यह तर्क देते हुए कि मणिपुर में स्थिति बहुत गंभीर है, ग्रोवर ने कहा कि दो शिकायतों में से एक समाचार पोर्टल को दिए गए साक्षात्कार से संबंधित है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर ने कोई भाषण नहीं दिया था और उन्हें सुरक्षा की जरूरत है ताकि वह इन शिकायतों के लिए उचित उपाय ढूंढ सकें।
मणिपुर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत याचिका के रूप में सीधे शीर्ष अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। संविधान का अनुच्छेद-32 मौलिक अधिकारों को लागू करने के उपायों से संबंधित है और 32 (1) कहता है कि इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को लागू करने के लिए उचित कार्यवाही द्वारा शीर्ष अदालत में जाने के अधिकार की गारंटी है।
मेहता ने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने वहां दायर निजी शिकायतों में से एक में आदेश पारित किया था। पीठ ने ग्रोवर से कहा, याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ग्रोवर ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल अंतरिम सुरक्षा चाहता है क्योंकि पूर्वोत्तर राज्य में जातीय संघर्ष के कारण स्थिति बहुत गंभीर है।
पीठ ने कहा कि हाउजिंग के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) और 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना है) सहित कई धाराओं के तहत दंडनीय कथित अपराधों के लिए एक आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी। कहा गया है कि मजिस्ट्रेट अदालत ने पिछले महीने आपराधिक शिकायत में याचिकाकर्ता को समन जारी किया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि एक अन्य शिकायत राज्य की मतदाता सूची में याचिकाकर्ता के नामांकन में कथित गड़बड़ी की जांच से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता सक्षम अदालत के समक्ष अग्रिम जमानत सहित उचित उपाय मांगने के लिए स्वतंत्र होगा।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत के पास मणिपुर में हिंसा से संबंधित याचिकाओं का अंबार लगा हुआ है। शीर्ष अदालत ने हाल ही में राज्य में महिलाओं पर गंभीर अत्याचारों के तरीके पर नाराजगी व्यक्त की थी और कहा था कि भीड़ दूसरे समुदाय को आधिपत्य का संदेश देने के लिए यौन हिंसा का इस्तेमाल करती है और राज्य इसे रोकने के लिए बाध्य है।