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Supreme Court: 12 साल से जेल में बंद शख्स की रिहाई का आदेश, शीर्ष अदालत ने कहा- हत्या के समय नाबालिग था आरोपी

Fri, 08 Sep 2023 03:48 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 08 Sep 2023 03:48 PM IST
सार

Supreme Court: उच्चतम न्यायालय ने हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले व्यक्ति को रिहा कर दिया है। वह बार से अधिक समय जेल में काट चुका है।

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SC orders release of man jailed for 12 yrs after finding he was juvenile at time of offence
court Order

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले व्यक्ति को रिहा कर दिया है। वह बार से अधिक समय जेल में काट चुका है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 2005 में अपराध के समय वह नाबालिग था। 

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न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की मई 2023 की रिपोर्ट का हवाला दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने व्यक्ति द्वारा नाबालिग होने की याचिका के संबंध में जांच करने के लिए कहा था। इसमें कहा गया था कि उसकी जन्मतिथि दो मई, 1989 है।

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पीठ ने कहा, 'अगर याचिकाकर्ता की जन्मतिथि दो मई 1989 है तो अपराध की तारीख यानी 21 दिसंबर 2005 को उसकी उम्र 16 साल सात महीने थी।'पांच अगस्त को पारित अपने आदेश में अदालत ने कहा, याचिकाकर्ता अपराध होने की तारीख पर कानून का उल्लंघन करने वाला किशोर था।'

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शीर्ष अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता की उस याचिका पर दिया जिसमें किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अनुसार नाबालिग होने के उसके दावे और परिणामी आदेशों के सत्यापन की मांग की गई थी।

पीठ ने कहा कि 2000 के कानून के प्रावधानों के अनुसार याचिकाकर्ता को अधिकतम तीन साल तक हिरासत में रखा जा सकता था। हमारे समक्ष वर्तमान रिट याचिका (2022 में दायर) में पहली बार नाबालिग होने की बात उठाई गई थी। 2005 में शुरू हुई आपराधिक कानून की प्रक्रिया के कारण याचिकाकर्ता को निचली अदालत, उच्च न्यायालय के द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।  पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता 12 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है।

पीठ ने कहा, खम्मम के द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की रिपोर्ट को स्वीकार करने के बाद याचिकाकर्ता को अब कैद नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए हम रिट याचिका की अनुमति देते हैं और निर्देश देते हैं कि अगर उसे किसी अन्य मामले में हिरासत में लेने की आवश्यकता नहीं है तो याचिकाकर्ता को तुरंत रिहा किया जाए।

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