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एएमयू वीसी नियुक्ति: जज विनोद चंद्रन ने सुनवाई से खुद को किया अलग, चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल
Mon, 18 Aug 2025 01:49 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 18 Aug 2025 01:49 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने एएमयू कुलपति नईमा खातून की नियुक्ति पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, क्योंकि वह पहले एक विश्वविद्यालय के चांसलर रह चुके थे। याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें प्रोफेसर नईमा खातून की नियुक्ति को सही ठहराया गया था। अब यह मामला किसी अन्य बेंच के सामने सुना जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की कुलपति नईमा खातून की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर दिया। चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह अपील मुजफ्फर उरुज रब्बानी ने दायर की है। इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें नईमा खातून की नियुक्ति को सही ठहराया गया था। प्रोफेसर नईमा खातून एएमयू की पहली महिला कुलपति बनी हैं।
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सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रन ने खुद को इस मामले से अलग करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि वह पहले एक विश्वविद्यालय के चांसलर रह चुके हैं और उन्होंने उस समय इसी तरह की चयन प्रक्रिया में भाग लिया था। जस्टिस चंद्रन ने कहा, मैं सीएनएलयू (कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी) का चांसलर था, तब मैंने फैजान मुस्तफा का चयन किया था... इसलिए मैं इस मामले से खुद को अलग कर सकता हूं।
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, हमें जस्टिस चंद्रन पर पूरा भरोसा है। हटने की कोई जरूरत नहीं है। आप इस मामले की सुनवाई कर सकते हैं। सीजेआई ने कहा, मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को फैसला करने दीजिए। यह मामला अब उस बेंच के सामने पेश किया जाएगा, जिसमें जस्टिस चंद्रन शामिल नहीं होंगे। अब यह याचिका किसी और बेंच के सामने सुनी जाएगी।
सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चयन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, अगर कुलपति इसी तरह से चुने जाएंगे, तो सोचकर ही डर लगता है कि भविष्य में क्या होगा। उन्होंने दावा किया कि दो अहम वोटों से नतीजा प्रभावित हुआ, जिनमें से एक वोट पूर्व कुलपति का था। सिब्बल ने कहा, अगर उन दो वोटों को हटा दें, तो उन्हें सिर्फ छह वोट ही मिलते।
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अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इस दलील का विरोध किया। उन्होंने कहा, यह प्रक्रिया आंशिक रूप से चयन और आंशिक रूप से चुनाव आधारित थी। हाईकोर्ट ने हमारी चुनाव वाली दलील को भले ही न माना हो, लेकिन उन्होंने उनकी नियुक्ति को सही बताया।