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Supreme court: जस्टिस इंदिरा बनर्जी सेवानिवृत्त, महिलाओं को शीर्ष न्यायपालिका में और जगह मिलने की जताई उम्मीद
Fri, 23 Sep 2022 10:34 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 23 Sep 2022 10:34 PM IST
सार
आखिरी कार्य दिवस पर जस्टिस बनर्जी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित के साथ औपचारिक पीठ साझा की, जिन्होंने उनके दो दशक लंबे करियर में न्यायपालिका में उनके योगदान की प्रशंसा की।
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जस्टिस इंदिरा बनर्जी
- फोटो : social media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट की निवर्तमान वरिष्ठ महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में और महिलाओं को शीर्ष न्यायपालिका के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाएगा। शीर्ष अदालत में पांचवें सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी चार साल से अधिक समय तक सेवा देने के बाद पद छोड़ देंगी। उनके अलावा शीर्ष अदालत में अन्य महिला न्यायाधीशों में जस्टिस हिमा कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला एम त्रिवेदी हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली आठवीं महिला न्यायाधीश थीं
जस्टिस बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली आठवीं महिला न्यायाधीश थीं और अब उनकी सेवानिवृत्ति के साथ शीर्ष अदालत में तीन महिला न्यायाधीश होंगी। 26 जनवरी, 1950 को अस्तित्व में आए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्थापना के बाद से और पिछले 72 वर्षों में बहुत कम सिर्फ 11 महिला न्यायाधीशों को देखा है। इसकी शुरुआत 1989 में न्यायमूर्ति एम फातिमा बीवी के साथ हुई थी। अन्य महिला न्यायाधीशों में जस्टिस सुजाता वी मनोहर, रूमा पाल, ज्ञान सुधा मिश्रा, रंजना पी देसाई, आर भानुमति और इंदु मल्होत्रा के नाम शामिल थे।
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आखिरी कार्य दिवस पर जस्टिस बनर्जी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित के साथ औपचारिक पीठ साझा की, जिन्होंने उनके दो दशक लंबे करियर में न्यायपालिका में उनके योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी बहन जस्टिस बनर्जी की कमी खलेगी। बीस साल के न्यायिक करियर में उन्होंने सब कुछ दिया है। उनमें वो सारे गुण हैं जो एक जज में होने चाहिए। हम सभी उन्हें बेंच पर मिस करेंगे और निश्चित रूप से वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी। तो, शुभकामनाएँ दीदी! आप सभी को शुभकामनाएं!
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7 अगस्त, 2018 को शीर्ष अदालत में पदोन्नत किया गया था
7 अगस्त, 2018 को जस्टिस बनर्जी को मद्रास उच्च न्यायालय से शीर्ष अदालत में पदोन्नत किया गया था, जहां वह मुख्य न्यायाधीश थीं। उन्होंने शीर्ष अदालत में अपने पहले दिन को याद करते हुए कहा कि यह बाकी दिनों की तरह ही लग रहा था जब वह 7 अगस्त 2018 को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) दीपक मिश्रा के साथ पीठ साझा कर रही थीं। मैं उस सहायता को स्वीकार करती हूं जो मुझे मिली है। अगर मैंने निर्णय दिए, तो यह उनकी (वकीलों की) सहायता से संभव हुआ, सुप्रीम कोर्ट बार बहुत मजबूत, स्वतंत्र और बुद्धिमान है।
मुझे उम्मीद है कि भविष्य में और भी महिलाएं होंगी, आशा है कि कमजोरों के लिए सहयोग होगा और कम समय में ही समानता आएगी और न्याय होगा। आप सभी का धन्यवाद। जस्टिस बनर्जी के सेवानिवृत्त होने से शीर्ष अदालत में सेवारत न्यायाधीशों की संख्या घटकर 29 हो जाएगी, जबकि सीजेआई सहित 34 की स्वीकृत संख्या है। अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एससीबीए अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने न्यायमूर्ति बनर्जी को उनके कार्यालय में अंतिम दिन शुभकामनाएं दीं।
पूर्व CJI एनवी रमण (फाइल)
- फोटो : PTI
16 महीनों में मैंने वह किया जो मैं कर सकता था: पूर्व CJI
इस बीच भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण ने कहा कि वह अपने 16 महीने के कार्यकाल के दौरान और न्यायाधीशों की नियुक्ति करके न्यायिक प्रणाली को मजबूत कर सकते थे, हालांकि वह पूरी तरह से ऐसा नहीं कर सके। न्यायमूर्ति रमण को हैदराबाद में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक की उपलब्धता के बावजूद पुरानी फिल्मों के विपरीत आज की फिल्मों में गुणवत्ता की कमी है और इसे सुधारने की जिम्मेदारी इंडस्ट्री की है। उन्होंने कहा कि आप सभी जानते हैं कि मेरे पास 16 महीने का समय था, मैंने वह किया जो मैं कर सकता था। मैं सब कुछ नहीं कर सका, क्योंकि यह संभव नहीं था। र्ण है क्योंकि लोगों को न्यायिक प्रणाली से सावधान नहीं रहना चाहिए।
इस बीच भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण ने कहा कि वह अपने 16 महीने के कार्यकाल के दौरान और न्यायाधीशों की नियुक्ति करके न्यायिक प्रणाली को मजबूत कर सकते थे, हालांकि वह पूरी तरह से ऐसा नहीं कर सके। न्यायमूर्ति रमण को हैदराबाद में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक की उपलब्धता के बावजूद पुरानी फिल्मों के विपरीत आज की फिल्मों में गुणवत्ता की कमी है और इसे सुधारने की जिम्मेदारी इंडस्ट्री की है। उन्होंने कहा कि आप सभी जानते हैं कि मेरे पास 16 महीने का समय था, मैंने वह किया जो मैं कर सकता था। मैं सब कुछ नहीं कर सका, क्योंकि यह संभव नहीं था। र्ण है क्योंकि लोगों को न्यायिक प्रणाली से सावधान नहीं रहना चाहिए।