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SC: 'कम लंबित मामले वाले राज्यों में उपभोक्ताओं की अपीलों की सुनवाई करें हाईकोर्ट', सुप्रीम कोर्ट का आदेश
Wed, 11 Feb 2026 08:27 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 11 Feb 2026 08:27 PM IST
सार
SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन राज्यों में उपभोक्ता मामलों के लंबित मामले बहुत कम हैं, वहां उच्च न्यायालय खुद सुनवाई करें। राज्यों में आयोग बनाए रखने पर सार्वजनिक धन का बोझ कम होगा। कोर्ट ने तीन महीने में मामलों की सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संविधान को अनुच्छेद 132 का इस्तेमाल करते हुए कुछ उच्च न्यायालयों को अहम आदेश दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालयों को राज्यों में कम लंबित उपभोक्ता शिकायतों और अपीलों की सुनवाई खुद करनी चाहिए। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति देता है कि वह 'पूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने के लिए किसी भी मामले में कोई भी आदेश दे।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत तीन स्तर की न्याय जैसी व्यवस्था है। इनमें जिला, राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एससीडीआरसी) और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) शामिल हैं। राज्य आयोग 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपए तक के दावों और जिला आयोग के आदेशों के खिलाफ अपीलों को सुनता है।
मुख्य न्यायाधीश (सूर्यकांत) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बेंच ने उन राज्यों की याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनके उपभोक्ता आयोगों में लंबित मामले कम थे। कुछ राज्यों ने कहा कि उनकी उपभोक्ता अदालतें एक साल से काम नहीं कर रही हैं।
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राज्यों ने शीर्ष कोर्ट को क्या बताया?
उच्च न्यायालयों से क्या कहा गया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कम लंबित मामलों के कारण राज्य उपभोक्ता आयोग बनाए रखना सार्वजनिक धन पर बोझ डाल सकता है। इसलिए, कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत संबंधित उच्च न्यायालयों को इन मामलों की सुनवाई का आदेश दिया। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को कहा गया कि वे एक अनुभवी जज को उपभोक्ता मामलों की सुनवाई के लिए नियुक्त करें। इस जज को एससीडीआरसी के तकनीकी सदस्यों से सहायता मिल सकती है। कोर्ट ने कहा, कोशिश करें कि यह काम तीन महीनों में पूरा हो।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक की दरगाह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, विवादित स्थल में पूजा पर रोक लगाने की मांग की
राज्य सरकारों को क्या निर्देश दिया?
राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया कि वे तीन हफ्ते में एससीडीआरसी के मामलों की फाइल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेजें। कोर्ट ने एनसीडीआरसी को भी कहा कि वे एससीडीआरसी मामलों को अपीलों को सुनवाई के लिए अपने न्यायिक सद्य की अध्यक्षता वाली बेंच को बेंच को भेजें। जिला आयोगों में भी कम लंबित मामलों की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की मदद लेने को कहा।
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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत तीन स्तर की न्याय जैसी व्यवस्था है। इनमें जिला, राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एससीडीआरसी) और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) शामिल हैं। राज्य आयोग 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपए तक के दावों और जिला आयोग के आदेशों के खिलाफ अपीलों को सुनता है।
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मुख्य न्यायाधीश (सूर्यकांत) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बेंच ने उन राज्यों की याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनके उपभोक्ता आयोगों में लंबित मामले कम थे। कुछ राज्यों ने कहा कि उनकी उपभोक्ता अदालतें एक साल से काम नहीं कर रही हैं।
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राज्यों ने शीर्ष कोर्ट को क्या बताया?
- अरुणाचल प्रदेश ने कहा कि उनके जिला आयोग और राज्य आयोग में केवल 59 मामले लंबित हैं।
- सिक्किम ने बताया कि उनके जिला आयोग में केवल 51 और राज्य आयोग में 24 मामले लंबित हैं। सिक्किम के आयोग में कोई न्यायिक सदस्य नहीं है, केवल दो तकनीकी सदस्य हैं। इससे शीर्ष कोर्ट ने उनकी दैनिक कार्यप्रणाली पर संदेह जताया।
- मणिपुर और गोवा में भी आयोग में अध्यक्ष और न्यायिक सदस्य नहीं थे।
- मिजोरम, नगालैंड, हिमाचल प्रदेश, अंडमान-निकोबार और मेघालय में पूर्ण न्यायिक पैनल है, लेकिन लंबित मामलों की संख्या बहुत कम है।
- मेघालय में केवल 15 मामले लंबित हैं।
उच्च न्यायालयों से क्या कहा गया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कम लंबित मामलों के कारण राज्य उपभोक्ता आयोग बनाए रखना सार्वजनिक धन पर बोझ डाल सकता है। इसलिए, कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत संबंधित उच्च न्यायालयों को इन मामलों की सुनवाई का आदेश दिया। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को कहा गया कि वे एक अनुभवी जज को उपभोक्ता मामलों की सुनवाई के लिए नियुक्त करें। इस जज को एससीडीआरसी के तकनीकी सदस्यों से सहायता मिल सकती है। कोर्ट ने कहा, कोशिश करें कि यह काम तीन महीनों में पूरा हो।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक की दरगाह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, विवादित स्थल में पूजा पर रोक लगाने की मांग की
राज्य सरकारों को क्या निर्देश दिया?
राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया कि वे तीन हफ्ते में एससीडीआरसी के मामलों की फाइल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेजें। कोर्ट ने एनसीडीआरसी को भी कहा कि वे एससीडीआरसी मामलों को अपीलों को सुनवाई के लिए अपने न्यायिक सद्य की अध्यक्षता वाली बेंच को बेंच को भेजें। जिला आयोगों में भी कम लंबित मामलों की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की मदद लेने को कहा।
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