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Supreme Court: फैसले के बावजूद तमिलनाडु सरकार की अनावश्यक अपील से कोर्ट नाखुश, लगाया पांच लाख का जुर्माना

Wed, 28 Sep 2022 04:52 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 28 Sep 2022 04:52 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि प्रतिवादी द्वारा पेंशन की पात्रता के संबंध में दायर याचिका पर मामला कोर्ट में समाप्त हो गया था, इस तथ्य के बावजूद राज्य सरकार ने यह तर्क देने का दुस्साहस किया कि प्रतिवादी पेंशन का हकदार नहीं था। 

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SC imposes Rs 5 lakh fine on Tamil Nadu government for filing unnecessary appeal
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमिलनाडु सरकार सर्वोच्च अदालत की ओर से फैसला दिए जाने के बावजूद एक मामले में 'अनावश्यक' अपील दायर कर रही थी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 

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न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने राज्य को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के साथ चार सप्ताह के भीतर (19 सितंबर से) पांच लाख रुपये जमा करने को कहा है। 
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पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि राज्य को इस तरह विशेष अनुमति याचिका दायर नहीं करनी चाहिए। पीठ ने कहा कि प्रतिवादी द्वारा पेंशन की पात्रता के संबंध में दायर याचिका पर मामला कोर्ट में समाप्त हो गया था, इस तथ्य के बावजूद राज्य सरकार ने यह तर्क देने का दुस्साहस किया कि प्रतिवादी पेंशन का हकदार नहीं था। 
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अदालत ने कहा कि जमा राशि को सुप्रीम कोर्ट की मीडिएशन और कॉन्सिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी को ट्रांसफर की जाए। पीठ ने कहा कि जब इस मामले को अदालत में समाप्त कर दिया गया था कि प्रतिवादी पेंशन का हकदार है तो राज्य के लिए  बहस करने का कोई विकल्प खुला नहीं था कि प्रतिवादी पेंशन का हकदार है।    

दरअसल, तमिलनाडु परिवहन विभाग में कंडक्टर के रूप में कार्यरत एक कर्मचारी ने पेंशन पात्रता से जुड़ी याचिका दायर की थी। इस पर शीर्ष अदालत उनकी पेंशन पात्रता की पुष्टि की थी। राज्य सरकार ने उनकी पेंशन का बकाये का भुगतान नहीं किया था और दलील दी थी कि कर्मचारी पेंशन का हकदार नहीं था। 


मद्रास हाईकोर्ट ने भी फरवरी 2022 में राज्य की इस दलील को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने इस मामले के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 

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