फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC expressed displeasure on the petition related to illegal construction Rajaji National Park

SC: राजाजी नेशनल पार्क के पास अवैध निर्माण से जुड़ी अर्जी पर शीर्ष कोर्ट ने जताई नाराजगी, याचिका पर उठाए सवाल

Fri, 20 Dec 2024 03:27 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Fri, 20 Dec 2024 03:27 PM IST
सार

कोर्ट ने उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क के पास अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई का आरोप लगाकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रायोजित याचिका लगती है। किसी को भी शीर्ष अदालत के अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं है।

विज्ञापन
SC expressed displeasure on the petition related to illegal construction Rajaji National Park
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को भी शीर्ष अदालत के अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं है। कोर्ट ने उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क के पास अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई का आरोप लगाकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रायोजित याचिका लगती है।

विज्ञापन


मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ को उत्तराखंड सरकार के वकील ने बताया कि पार्क की जिस जमीन पर अवैध निर्माण की बात कही गई है, निरीक्षण के दौरान वह जमीन निजी संपत्ति पाई गई। वकील ने कहा कि आवेदक ने अवैध निर्माण आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर जमीन की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था। 
विज्ञापन


वकील ने कहा कि जांच के दौरान यह निजी भूमि पाई गई। यहां पर प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र चलाया जा रहा था। साथ ही पोर्टा केबिन कॉटेज बनाए जा रहे थे। वहीं सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने कई पेड़ों की कटाई के अलावा राष्ट्रीय उद्यान के पास बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण का दावा किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस पर राज्य के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने याचिका में भूमि मालिक को प्रतिवादी के रूप में भी शामिल नहीं किया। इसके बाद शीर्ष अदालत की पीठ ने याचिकाकर्ता से भूमि के मालिक को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने के लिए कहा। अदालत ने कहा कि इसके बाद आवेदन की एक प्रति शीर्ष अदालत के न्याय मित्र को भी दी जाए। मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। 


इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देने की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि निर्माण किसी कानून या शीर्ष अदालत द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो वह इसे ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है। अगर ऐसा नहीं पाया जाता है, तो हम आवेदन को 10 लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि किसी को भी शीर्ष अदालत के अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed