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SC: पुलिस को निर्देश- पूर्व CJI की नियुक्ति को चुनौती के मामले में वादी से वसूलें जुर्माना, जानें पूरा मामला

Sat, 06 Aug 2022 08:14 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 06 Aug 2022 08:14 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली 2017 में एक याचिका दायर करने वाले एक वादी से जुर्माने की वसूली के लिए जरूरी कदम उठाएं। इस मामले में एक वादी से 10 लाख रुपये के जुर्माने की वसूली की जानी है।  यह याचिका दो लोगों ने दायर की थी। 

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SC directs Police to ensure recovery of Rs 10 lakh imposed on petitioner challenging ex-CJI Misra appointment
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश  के उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश करने की प्रथा पर सवाल उठाने वाले स्वामी ओम (अब मृतक) और मुकेश जैन के खिलाफ लगाए गए जुर्माने की वसूली के लिए जरूरी कदम उठाएं। अदालत ने इस मामले में पहले ही आदेश दिया था कि सक्षम प्राधिकारी जैन की भूमि से  जुर्माने की रकम की वसूली कर सकते हैं। 

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न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस संदर्भ में दिल्ली पुलिस के आयुक्त को यह सुनिश्चित करने के लिए जरूी कदम उठाने का निर्देश दिया कि जुर्माने की वसूली के संबंध में अदालत के आदेश को विधिवत लागू किया जाए।
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त, 2017 को स्वामी ओम (अब मृतक) और मुकेश जैन द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पूरी तरह से प्रेरित और प्रचार स्टंट थी। अदालत ने प्रत्येक याचिकाकर्ता के खिलाफ 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जुर्माने की राशि को दिल्ली में उसकी अचल संपत्तियों से भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल किया जाए। अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर इस पर त्वरित कार्रवाई करें और तीन महीने के अंदर आदेश के अनुपालन की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेंगे।
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गौरतलब है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने  छह मई 2022 को मुकेश जैन की दिल्ली और कटक में अचल संपत्तियों को कुर्क करने का निर्देश दिया था। जैन के वकील ने अदालत को सूचित किया था कि उनके मुवक्किल ने अपना आवास कटक में स्थानांतरित कर दिया है। इसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट को उनके आवासीय पते का विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर मुकेश जैन का पता नहीं चलता है तो उसे जमानती वारंट जारी किया जाना चाहिए।

आरोपी को बरी करने के आदेश में हल्केपन से हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

SC directs Police to ensure recovery of Rs 10 lakh imposed on petitioner challenging ex-CJI Misra appointment
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी आरोपी को बरी करने के आदेश में हल्केपन से हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए शीर्ष कोर्ट ने पत्नी के खिलाफ क्रूरता के एक आरोपी को दोषमुक्त करने के फैसले को फिर बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने पाया कि अपीलीय अदालत को बरी करने के किसी आदेश को रद्द करने से बरी करने के लिए दिए गए हर कारण पर विचार करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए यह बात कही। मद्रास हाईकोर्ट ने निचली अदालत से बरी किए गए आरोपी को दोषी ठहराने का आदेश दिया था। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एसआर भट की पीठ ने कहा, अपीलीय कोर्ट ने इस बात का कोई कारण नहीं बताया कि बरी करने के आदेश को क्यों खारिज किया जाना चाहिए।
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