{"_id":"627fdacc8bf40e72133930db","slug":"sc-commutes-death-sentence-of-rape-murder-convict-to-life-imprisonment","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला, अच्छे आचरण का दिया हवाला ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला, अच्छे आचरण का दिया हवाला
Sat, 14 May 2022 10:07 PM IST
Amit Mandal
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 14 May 2022 10:07 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि इस मामले को दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है, जिसमें मौत की सजा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी व्यक्ति की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। अदालत ने आरोपी में सुधार और पुनर्वास की संभावना को देखते हुए यह आदेश सुनाया। शीर्ष अदालत ने कहा, हमारा विचार है कि मौत की सजा देने से पहले अपराध परीक्षण और आपराधिक परीक्षण का पालन करना चाहिए। इसने ट्रायल कोर्ट के साथ-साथ हाई कोर्ट का भी आवश्यक ध्यान आकर्षित नहीं किया।
विज्ञापन
आरोपी गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से है
निर्विवाद तथ्य यह है कि अपीलकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और वह एक गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से है। अदालत ने कहा कि जेल के अंदर उसके बेदाग आचरण पर ध्यान दिए बिना नहीं रहा जा सकता। अदालत ने यह भी देखा कि अपराध के समय दोषी की उम्र 25 वर्ष थी और कहा कि इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हमें अपीलकर्ता के सुधार और पुनर्वास के संबंध में संभावना दिखती है।
विज्ञापन
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस चर्चा की लंबी और छोटी बात यह है कि इस मामले को दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है, जिसमें मौत की सजा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अदालत ने समय से पहले रिहाई के प्रावधानों को लागू किए बिना 30 साल की अवधि के लिए कारावास का प्रावधान करके दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
विज्ञापन
हालांकि न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की पीठ ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें व्यक्ति को धारा 302 और 376 (2) (i)आईपीसी के तहत दंडनीय अपराध और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था।
बीएएमएस में खाली सीटों पर दाखिला देने की मांग
बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) पाठ्यक्रम के एक उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट से बड़ी संख्या में खाली सीटों को देखते हुए पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अंक प्रतिशत को कम करने का निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाने की अपील की है। याचिकाकर्ता और बीएएमएस कोर्स में प्रवेश के इच्छुक अमित कुमार ने नीट-2021 में जरूरी 45 पर्सेंटाइल के मुकाबले 44.41 पर्सेंटाइल हासिल किया है। अधिवक्ता नीरज शेखर के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि आयुर्वेद पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए सभी दौर की काउंसलिंग के बाद मध्य प्रदेश में 381 सीटें, यूपी में 962 सीटें और उत्तराखंड में 338 सीटें अभी भी खाली हैं।