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एनसीआर में आवाजाही के लिए एक पास, एक नीति बनाई जाए: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 04 Jun 2020 12:17 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 04 Jun 2020 12:17 PM IST
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SC asks Union of India to convene meeting of representatives of three states on commuters
दिल्ली बॉर्डर सील होने के चलते सीमाओं पर लगा जाम (फाइल फोटो) - फोटो : सुदर्शन झा/जी पाल

लॉकडाउन के दौरान सीमाएं सील होने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर में आवाजही के लिए एक कॉमन पास होना चाहिए, जो उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में मान्य हो। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार को तीनों राज्यों के प्रतिनिधियों या अफसरों के साथ मिलकर एक बैठक कर समाधान निकालना चाहिए। पीठ ने एक सप्ताह के भीतर इसे लेकर एकसमान नीति और एकसमान पोर्टल तैयार करने का भी निर्देश दिया है।

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पीठ ने कहा, ऐसी कॉमन योजना या नीति प्लेटफॉर्म बनाई जानी चाहिए, ताकि एनसीआर में लोगों की आवाजाही बिना परेशानी के हो सके। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन देते हुए कहा है कि वह इसके लिए केंद्र सरकार से निर्देश लेंगे ताकि एक समान नीति हो और लोगों को परेशानी न हो। इसे लेकर जल्द ही बैठक की जाएगी।
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हालांकि, इससे पहले मेहता ने पीठ से कहा था कि एनसीआर के शहरों में आवाजाही पर राज्य सरकारें निर्णय लेती है, इससे केंद्र सरकार का कोई लेना देना नहीं है। वहीं, सुनवाई के दौरान हरियाणा ने कहा कि हमने सभी प्रतिबंध हटा दिए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा हालात में एक नीति, एक रास्ता और एक पोर्टल बनाया जाए। पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा था।
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बता दें कि कोरोना संक्रमण के कारण दिल्ली-एनसीआर की सीमाएं सील हैं। इसके चलते लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर ही सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एनसीआर क्षेत्र के लिए कॉमन पास बनाने का निर्देश दिया है ताकि लोग आसानी से आवाजाही कर सकें।

जनहित याचिका में पाबंदी को असांविधानिक बताया

सुप्रीम कोर्ट रोहित भल्ला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में एनसीआर में एक शहर से दूसरे शहरों में जाने पर पाबंदी को चुनौती दी गई है। याचिका में इस पाबंदी को असंवैधानिक बताया गया है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई गई है कि एनसीआर में रहने वाले वकीलों को दिल्ली आने-जाने में छूट दी जाए।

 यूपी सरकार बोली, खुली छूट नहीं दे सकते, पैसों से ज्यादा अहम लोगों की सेहत

वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि दिल्ली में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए एनसीआर के लोगों को दिल्ली आने-जाने की खुली छूट नहीं दी जा सकती है। यूपी सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सरकार के लिए पैसे और उद्योग से अधिक महत्वपूर्ण लोगों का स्वास्थ्य है।

यूपी सरकार ने कहा कि लोगों की सेहत से किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है।  यूपी सरकार ने कहा कि नोएडा में 293 कोरोना पॉजिटिव हैं, जबकि दिल्ली में इसकी संख्या 11,088 हजार से ज्यादा मामले हैं। ऐसे में यूपी सरकार बहुत सतर्कता बरत रही है। अगर महामारी के इस दौर में आवाजाही पूरी तरह से खोल दी गई तो यह परेशानी का सबब बन सकती है।

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