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SC: क्या दाभोलकर, पंसारे, लंकेश और कलबुर्गी की हत्या में कोई समानता थी? सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से किया सवाल

Fri, 18 Aug 2023 06:39 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 18 Aug 2023 06:39 PM IST
सार

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने नरेंद्र दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से यह सवाल किया।

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SC asks CBI whether there was common thread in murders of Dabholkar, Pansare, Lankesh and Kalburgi
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

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उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सीबीआई से पूछा कि क्या तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर, सीपीआई नेता गोविंद पंसारे, कार्यकर्ता-पत्रकार गौरी लंकेश और स्कॉलर एमएम कलबुर्गी की हत्याओं में कोई “सामान्य बात” थी। अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाने वाले दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान दो मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पंसारे की हत्या 20 फरवरी, 2015 को हुई थी, जबकि लंकेश की हत्या पांच सितंबर, 2017 को हुई थी। कलबुर्गी की 30 अगस्त, 2015 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने नरेंद्र दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से यह सवाल किया। मुक्ता दाभोलकर ने अपने पिता की हत्या की जांच की निगरानी जारी रखने से इनकार करने के बॉम्बे उच्च न्यायालय के इस साल 18 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी है। मुक्ता दाभोलकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने पीठ से कहा कि चारों हत्याओं के पीछे एक बड़ी साजिश थी। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सबूतों से संकेत मिलता है कि ये मामले जुड़े हो सकते हैं और मुक्ता दाभोलकर ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा उठाया था।

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न्यायमूर्ति धूलिया ने सीबीआई की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी से पूछा, जो आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे हैं (दाभोलकर मामले में), आपके अनुसार, उन चार हत्याओं में कोई सामान्य सूत्र नहीं है? ठीक है? आप यही कह रहे हैं? न्यायमूर्ति कौल ने कहा, हम यही जानना चाहते हैं और उन्होंने सीबीआई से कहा, कृपया इस पर गौर करें।
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जैसे ही ग्रोवर ने मामले से जुड़े मुद्दों पर बहस शुरू की, पीठ ने उनसे कहा कि उच्च न्यायालय ने कहा है कि दाभोलकर हत्या मामले में मुकदमा चल रहा है और कुछ गवाहों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। पीठ ने उनसे पूछा, “...तो इसलिए हम (उच्च न्यायालय) इसकी और निगरानी नहीं करना चाहते। इस तरह की टिप्पणी में गलत क्या है?” ग्रोवर ने कहा कि मुकदमा चल रहा है, लेकिन दो आरोपी फरार हैं और उन्हें अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

दाभोलकर हत्याकांड की स्थिति बताते हुए भाटी ने पीठ को बताया कि मुकदमे के दौरान अब तक 20 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है। पीठ ने भाटी से कहा कि याचिकाकर्ता ने साजिश के बड़े पैमाने पर फैलने का भी आरोप लगाया है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने कहा है कि उन्हें संबंधित हिस्सों के अनुवाद के साथ कुछ दस्तावेज पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय चाहिए, जिससे एएसजी को इन हत्याओं से जुड़ी बड़ी साजिश के मुद्दे की जांच करने में मदद मिलेगी।

पीठ ने कहा, एएसजी को उपरोक्त मुद्दे की जांच करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाता है। पीठ ने मामले को आठ सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। ग्रोवर ने 18 मई को शीर्ष अदालत को बताया था कि सीबीआई को संदेह है कि दाभोलकर, पंसारे और लंकेश की हत्याओं में कोई सामान्य लिंक हो सकता है। उन्होंने कहा था, जांच में पाया गया है कि इन बाद की घटनाओं (पंसारे और लंकेश की हत्या) और दाभोलकर की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार एक ही थे और अपराधों में शामिल लोग भी वही थे। इसलिए, सीबीआई आगे की जांच करना चाहती थी।

नरेंद्र दाभोलकर मामले की जांच की नौ साल तक निगरानी करने के बाद उच्च न्यायालय ने 18 अप्रैल को कहा था कि जांच पर और निगरानी की जरूरत नहीं है। उच्च न्यायालय ने निरंतर निगरानी के लिए मुक्ता दाभोलकर द्वारा दायर याचिका सहित कई याचिकाओं का निपटारा किया था। 2014 में मुक्ता दाभोलकर और एक अन्य कार्यकर्ता की याचिका के बाद उच्च न्यायालय ने मामले की जांच पुणे पुलिस से सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया था।


पुणे की एक विशेष अदालत ने 2021 में अपराध के कथित मास्टरमाइंड वीरेंद्र सिंह तावड़े के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत ने तावड़े और तीन अन्य पर हत्या और आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत आतंक से संबंधित अपराधों का आरोप लगाया था। एक अन्य आरोपी संजीव पुनालेकर पर सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया गया था।

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