{"_id":"6836ef2a1ddfd96c470401be","slug":"sc-asks-assam-human-rights-commission-to-probe-police-encounter-cases-news-in-hindi-2025-05-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: असम में पुलिस एनकाउंटर पर 'सुप्रीम' आदेश, मामलों की जांच के लिए मानवाधिकार आयोग को दिया आदेश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: असम में पुलिस एनकाउंटर पर 'सुप्रीम' आदेश, मामलों की जांच के लिए मानवाधिकार आयोग को दिया आदेश
Wed, 28 May 2025 04:41 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 28 May 2025 04:41 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को असम में मई 2021 से अगस्त 2022 के बीच हुए पुलिस एनकाउंटर मामलों की स्वतंत्र जांच के लिए असम मानवाधिकार आयोग (एएचआरसी) को निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि सभी मामलों को एक साथ झूठा मानना सही नहीं होगा, लेकिन कुछ मामलों में ज़रूर और जांच की ज़रूरत है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता आरिफ मोहम्मद यासीन जव्वादर की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया।
यह भी पढ़ें - Mock Drills: गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में कल शाम को मॉक ड्रिल; लोगों से सतर्क रहने को कहा गया
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि मई 2021 से अगस्त 2022 के बीच असम में 171 पुलिस एनकाउंटर हुए, जिनमें सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और कई 'फर्जी एनकाउंटर' थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनमें से ज्यादातर मामलों में तथ्यों की पुष्टि नहीं हो सकी और सिर्फ कुछ मामलों में ही आगे की जांच की जरूरत है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा, 'हम इस मामले को असम मानवाधिकार आयोग को सौंपते हैं ताकि वह स्वतंत्र और तेजी से जांच कर सके।' 'जांच के दौरान पीड़ितों और उनके परिवारों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाए।' 'आयोग एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं से मामले की जानकारी मांगे, लेकिन उनकी पहचान गोपनीय रखी जाए।' इसके सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार से कहा कि, आयोग को जांच में पूरा सहयोग दे। अगर जांच में कोई बाधा हो रही हो तो उसे दूर किया जाए। पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता देने के लिए असम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं।
पृष्ठभूमि में क्या हुआ था?
फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इससे पहले, असम सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वह 2014 में पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन कर रही है। सरकार ने कहा था कि सुरक्षा बलों को अनावश्यक रूप से निशाना बनाना उनका मनोबल गिरा सकता है।
यह भी पढ़ें - महाराष्ट्र: सावरकर पर राहुल की टिप्पणी पर बिफरे UBT नेता, कांग्रेस नेता के चेहरे पर कालिख पोतने की दी धमकी
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने क्या दिया था फैसला
जनवरी 2023 में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। उसने असम सरकार के हलफनामे का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि मई 2021 से अगस्त 2022 के बीच 171 एनकाउंटर हुए, जिनमें 56 लोग मारे गए (इनमें से 4 की मौत पुलिस हिरासत में हुई) और 145 लोग घायल हुए। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में कहा था कि उसने याचिका दाखिल करने से पहले ही असम पुलिस ने 80 से ज्यादा फर्जी एनकाउंटर किए, जिनमें 28 लोग मारे गए।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - Mock Drills: गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में कल शाम को मॉक ड्रिल; लोगों से सतर्क रहने को कहा गया
विज्ञापन
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि मई 2021 से अगस्त 2022 के बीच असम में 171 पुलिस एनकाउंटर हुए, जिनमें सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और कई 'फर्जी एनकाउंटर' थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनमें से ज्यादातर मामलों में तथ्यों की पुष्टि नहीं हो सकी और सिर्फ कुछ मामलों में ही आगे की जांच की जरूरत है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा, 'हम इस मामले को असम मानवाधिकार आयोग को सौंपते हैं ताकि वह स्वतंत्र और तेजी से जांच कर सके।' 'जांच के दौरान पीड़ितों और उनके परिवारों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाए।' 'आयोग एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं से मामले की जानकारी मांगे, लेकिन उनकी पहचान गोपनीय रखी जाए।' इसके सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार से कहा कि, आयोग को जांच में पूरा सहयोग दे। अगर जांच में कोई बाधा हो रही हो तो उसे दूर किया जाए। पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता देने के लिए असम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं।
पृष्ठभूमि में क्या हुआ था?
फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इससे पहले, असम सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वह 2014 में पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन कर रही है। सरकार ने कहा था कि सुरक्षा बलों को अनावश्यक रूप से निशाना बनाना उनका मनोबल गिरा सकता है।
यह भी पढ़ें - महाराष्ट्र: सावरकर पर राहुल की टिप्पणी पर बिफरे UBT नेता, कांग्रेस नेता के चेहरे पर कालिख पोतने की दी धमकी
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने क्या दिया था फैसला
जनवरी 2023 में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। उसने असम सरकार के हलफनामे का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि मई 2021 से अगस्त 2022 के बीच 171 एनकाउंटर हुए, जिनमें 56 लोग मारे गए (इनमें से 4 की मौत पुलिस हिरासत में हुई) और 145 लोग घायल हुए। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में कहा था कि उसने याचिका दाखिल करने से पहले ही असम पुलिस ने 80 से ज्यादा फर्जी एनकाउंटर किए, जिनमें 28 लोग मारे गए।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन