फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC agrees to hear plea seeking payment of wages to MNREGA workers

सुप्रीम कोर्ट में याचिका: मनरेगा श्रमिकों को वेतन भुगतान पर सुनवाई को अदालत तैयार, अधिकतर राज्यों के पास देने के लिए धन नहीं

Wed, 20 Apr 2022 04:13 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 20 Apr 2022 04:13 PM IST
सार

स्वराज अभियान ने एक आवेदन दायर कर केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने का निर्देश मांगा था कि सभी लंबित वेतन, सामग्री और प्रशासनिक भुगतान को 30 दिनों के भीतर मंजूरी दे दी जाए।

विज्ञापन
SC agrees to hear plea seeking payment of wages to MNREGA workers
मनरेगा श्रमिक - फोटो : amar ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को देश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (मनरेगा) के तहत श्रमिकों की स्थिति के निवारण के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। इसमें दावा किया गया है कि ज्यादातर राज्यों में श्रमिकों की लंबित मजदूरी नकारात्मक शेष राशि के साथ जमा हो रही है। 

विज्ञापन


मनरेगा श्रमिकों को भुगतान नहीं मिल रहा  
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता एनजीओ स्वराज अभियान के वकील प्रशांत भूषण द्वारा मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का उल्लेख किए जाने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। भूषण ने पीठ से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने को कहा क्योंकि मनरेगा श्रमिकों को भुगतान नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन


स्वराज अभियान ने एक आवेदन दायर कर केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने का निर्देश मांगा था कि सभी लंबित वेतन, सामग्री और प्रशासनिक भुगतान को 30 दिनों के भीतर मंजूरी दे दी जाए। याचिका में कहा गया है कि करोड़ों श्रमिक संकट में हैं क्योंकि धन की कमी वाले राज्यों के पास केंद्र की प्रमुख 100-दिवसीय नौकरी योजना मनरेगा के तहत 9,682 करोड़ रुपये का वेतन बकाया है। महामारी के कारण लाभार्थियों में और बढ़ोतरी हुई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


राज्य सरकारों पर 9,682 करोड़ रुपये का वेतन बकाया
याचिका में कहा गया है कि 26 नवंबर 2021 तक राज्य सरकारें 9,682 करोड़ रुपये के संचयी वेतन बकाया का सामना कर रही थीं और वित्तीय वर्ष के लिए आवंटित धन का 100 प्रतिशत समाप्त हो गया था। याचिका में दावा किया गया है कि मनरेगा के तहत मजदूरी का बकाया जमा हो रहा है क्योंकि ज्यादातर राज्यों को इस योजना के तहत पर्याप्त धन नहीं मिला है।


याचिका में कहा गया है कि जिस धन की कमी का हवाला दिया जा रहा है, वह कानून का घोर उल्लंघन है। एनजीओ ने अदालत से तत्काल निर्देश मांगा कि प्रत्येक परिवार को मनरेगा के तहत एक वर्ष में 50 अतिरिक्त दिन का रोजगार प्रदान किया जाए, सीधे नरेगा सॉफ्ट वेबसाइट पर काम की मांग के पंजीकरण की अनुमति दी जाए और रोजाना की रसीदें जारी की जाएं, स्वचालित रूप से 1/4 पर बेरोजगारी भत्ता की गणना और भुगतान किया जाए।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed