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Supreme Court: भ्रष्टाचार के मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों को मिली छूट होगी खत्म; बहाल हुई DSPE एक्ट की ये धारा
Mon, 11 Sep 2023 11:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 11 Sep 2023 11:03 PM IST
सार
संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत के 6 मई, 2014 के फैसले को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने मई 2014 के अपने फैसले में अधिनियम की धारा 6ए(1) को अमान्य ठहराया था। साथ ही कहा था कि धारा 6ए में दिया गया संरक्षण भ्रष्टों को बचाने की प्रवृत्ति है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम के एक प्रावधान पर फैसला सुनाया है। इस फैसले के जरिए केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में जांच शुरू करने से पहले केंद्र की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने ये फैसला दिया।
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संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत के 6 मई, 2014 के फैसले को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने मई 2014 के अपने फैसले में अधिनियम की धारा 6ए(1) को अमान्य ठहराया था। साथ ही कहा था कि धारा 6ए में दिया गया संरक्षण भ्रष्टों को बचाने की प्रवृत्ति है। धारा 6ए में यह प्रावधान किया गया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा संयुक्त सचिव स्तर से लेकर केंद्र सरकार के नौकरशाहों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य थी।
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2014 के फैसले में, शीर्ष अदालत ने कहा था कि अधिकारियों के बीच उनकी स्थिति और रैंक के आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता है। हालांकि उस फैसले में यह साफ नहीं किया गया था कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच किए जा रहे मौजूदा मामलों का क्या होगा। ऐसे में संविधान पीठ इस पर भी विचार कर रही थी कि क्या 2014 के फैसले का मौजूदा भ्रष्टाचार के मामलों पर असर पड़ेगा। अब जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, अभय एस ओका, विक्रम नाथ और जेके माहेश्वरी की पीठ ने यह साफ कर दिया है कि 2014 के फैसले का पूर्वव्यापी प्रभाव होगा।
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पीठ ने कहा कि धारा 6 A कानूनी प्रक्रिया का एक हिस्सा है जो विशेष रूप से वरिष्ठ सरकारी कर्मचारियों पर लागू होती है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 20(1) का डीएसपीई अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिकता पर कोई प्रभाव नहीं है। अनुच्छेद 20(1) में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को अधिनियम के समय लागू कानून के उल्लंघन के अलावा किसी भी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जाएगा।
पीठ ने कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी के मामले में संविधान पीठ द्वारा (मई 2014 में) दिया फैसला पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होगा। डीएसपीई कानून की धारा 6(ए) को इसे सम्मिलित किए जाने की तारीख से लागू नहीं माना जाएगा जो कि 11 सितंबर 2003 है। बता दें कि शीर्ष कोर्ट ने बीते साल दो नवंबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।