EC: सान्याल बोले- वैश्विक एजेंसियों की भारत को दी गई रेटिंग बेतुकी, पश्चिम के मानकों में बंधने की जरूरत नहीं
ईएसी-पीएम के सदस्य ने कहा कि सुधारों के मोर्चे पर सरकार का अगला एजेंडा प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्र होगा। इन दोनों स्तर पर दो बड़े सुधारों की जरूरत है। इसके लिए व्यापक स्तर पर लोगों के समर्थन की जरूरत है। सान्याल ने कहा कि जब कभी हम कदम उठाते हैं, उसका विरोध होता है।
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प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि वैश्विक साख मूल्यांकन एजेंसियों की ओर से भारत को दी गई मौजूदा सॉवरेन रेटिंग पूरी तरह बेतुकी है। इन एजेंसियों को भारत को कम-से-कम एक या दो श्रेणी ऊपर की रेटिंग देनी चाहिए। सान्याल ने कहा, भारत को निवेश श्रेणी में सबसे नीचे रहने का कोई कारण नहीं है। रेटिंग एजेंसियों के ढांचे पर सवाल उठाया जाना चाहिए। भारत को एहसास होना चाहिए कि उन्हें आसानी से बदला जा सकता है।
केयरएज रेटिंग्स के कार्यक्रम में उन्होंने कहा, हमें पश्चिम के उन नियमों व मानदंडों में बंधे नहीं रहना चाहिए, जिन्हें बनाने में हमारी भूमिका नहीं थी। कई ऐसे सूचकांक हैं, जहां हम 100 स्थान से भी नीचे आते हैं। आप देखेंगे कि सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को 'लोकतंत्र सूचकांक' में 102 या 106 या ऐसी ही बेतुकी रैंकिंग पर रखा गया है। अभिव्यक्ति की आजादी व हैपीनेस सूचकांक की भी ऐसी ही स्थिति है।
प्रशासनिक-कानूनी सुधार सरकार के एजेंडे में
ईएसी-पीएम के सदस्य ने कहा कि सुधारों के मोर्चे पर सरकार का अगला एजेंडा प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्र होगा। इन दोनों स्तर पर दो बड़े सुधारों की जरूरत है। इसके लिए व्यापक स्तर पर लोगों के समर्थन की जरूरत है। सान्याल ने कहा कि जब कभी हम कदम उठाते हैं, उसका विरोध होता है। ब्रिटिश ने जो प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था बनाई थी, उसका एकमात्र मकसद चीजों को काबू में रखना था। उद्योग मंडल भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, 2014 के बाद जब वर्तमान सरकार ने केंद्र में सत्ता संभाली तो सुधारों का नया चक्र शुरू हुआ। नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को लेकर सुधार हुए। दिवालिया कानून व जीएसटी जैसे सुधार लाए गए। महंगाई को काबू में रखने को कदम उठाए गए।
दुनिया के लिए मानक बनाने का भारत के पास सही समय
हमने अन्य लोगों को हमारी रेटिंग तय करने की अनुमति दी है। अब समय आ गया है कि एक उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में भारत अपनी शर्तों पर दुनिया के लिए नियम और मानदंड बनाए। हमें ऐसा करने की आदत डालनी होगी। पहली बार एक भारतीय रेटिंग एजेंसी बाकी दुनिया को सॉवरेन रेटिंग देगी। -संजीव सान्याल, सदस्य, ईएसी-पीएम
आर्थिक मोर्चे पर स्थिरता
अर्थव्यवस्था: जीडीपी पर सान्याल ने कहा, इस साल आर्थिक वृद्धि दर 6.5 से 7.0 फीसदी के बीच होगी। इस समय देश में वृहद आर्थिक मोर्चे पर स्थिरता है। चालू खाता घाटा एक दायरे में है। विदेशी मुद्रा भंडार 600 अरब डॉलर है। अर्थव्यवस्था के आकार पर उन्होंने कहा, हम निश्चित रूप से जर्मनी और जापान से आगे निकल जाएंगे। लेकिन, तीसरी सबसे बड़ी जीडीपी बनने के बाद अगली दो अर्थव्यवस्थाएं हमसे बहुत आगे होंगी।
महंगाई: सब्जियों की कीमत में कभी-कभार होने वाली कुछ बढ़ोतरी को छोड़ दिया जाए तो महंगाई को लेकर दबाव उतना ज्यादा नहीं है।
बुनियादी ढांचे में निवेश का लाभ
बुनियादी ढांचे में पूर्व में किए गए निवेश का लाभ अब मिल रहा है। इस समय विकास के लिए ‘एक्सिलेरेटर’ पर दबाव डालने की जरूरत नहीं है। ऐसा तब किया जा सकता है, जब रास्ते में बाधाएं न हों। निर्यात मांग कम होने के साथ घरेलू मांग को गति देने के लिए प्रोत्साहन देने की जरूरत नहीं है। इससे बाहरी क्षेत्र पर दबाव बन सकता है। चालू खाता घाटे के मोर्चे पर समस्या खड़ी हो सकती है।