Same Sex Marriage: समलैंगिक विवाह को लेकर संत समाज में रोष, 428 से ज्यादा जिलों में डीएम सौंपेगे ज्ञापन
Same Sex Marriage: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) दिल्ली प्रांत ने शुक्रवार को समलैंगिक विवाह को अनुमति देने के मामले पर कड़ा विरोध जताया है। शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में विहिप से जुड़े संत लोकेश मुनी ने कहा कि समलैंगिक विवाह भारत की संस्कृति से मेल नहीं खाता। अतः ऐसे किसी भी अधिकार को कानूनी मान्यता देना गलत है...
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सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक बैंच में समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सुनवाई जारी है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के किसी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले विभिन्न पक्ष अपने-अपने माध्यम से इसे लेकर नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि समलैंगिक विवाह को अनुमति देने से भारतीय विवाह परंपरा और परिवार संस्था संकट में पड़ जाएगी। इस मुद्दे के विरोध में देश के 428 जिलों के जिलाधिकारियों को ज्ञापन देने का काम शुरू किया गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के विधिक विभाग ने अयोध्या की दो दिवसीय बैठक में एक प्रस्ताव पास कर समलैंगिक विवाह का विरोध करने का निर्णय किया था। इसके पूर्व बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी समलैंगिक विवाह को सही न मानते हुए यह मामला देश की संसद पर छोड़ने की बात कही थी।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) दिल्ली प्रांत ने शुक्रवार को समलैंगिक विवाह को अनुमति देने के मामले पर कड़ा विरोध जताया है। शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में विहिप से जुड़े संत लोकेश मुनी ने कहा कि समलैंगिक विवाह भारत की संस्कृति से मेल नहीं खाता। अतः ऐसे किसी भी अधिकार को कानूनी मान्यता देना गलत है। उन्होंने कहा कि संविधान सबको अपने ढंग से जीने का अधिकार देता है, किंतु समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता प्रदान करना भारत की सभ्यता एवं संस्कृति के खिलाफ होगा।
विहिप के दिल्ली प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना ने कहा कि भारतीय समाज संविधान के अनुसार चलना जानता है। उसने सैकड़ों साल तक भगवान राम के मंदिर के लिए न्याय की प्रतीक्षा की। आज भी न्यायपालिका से इस मुद्दे पर भारतीय जनमानस को ध्यान में रखते हुए न्याय की प्रतीक्षा है। उन्होंने कहा कि लोगों में यह आम धारणा है कि समलैंगिकता को मान्यता प्राप्त होने से भारत की संस्कृति-सभ्यता और इसकी मूलभूत धार्मिक भावनाओं को खतरे में डालने जैसा होगा।