अमेठी के संजय सिंह ने बताया क्यों कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का कमल थामा
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अमेठी के डा. संजय सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे पुत्र संजय गांधी के दोस्त रहे हैं। संजय गांधी को अमेठी ले जाकर उन्हें लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने वाले रहे हैं और मंगवार 30 जुलाई को डा. संजय सिंह ने 40 साल पुरानी अपनी पार्टी छोड़ दी। संजय सिंह कल एक बार फिर भाजपा का दामन थामेंगे। वो पहले भी एक बार भाजपा में रह चुके है। संजय सिंह के साथ उनकी पत्नी अमिता सिंह भी भाजपा में शामिल होंगी। संजय सिंह और अमिता सिंह को कल कार्यवाहक भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, स्मृति ईरानी समेत अन्य भाजपा की सदस्यता दिलाएंगे। खास बात यह है कि संजय सिंह ने यह कदम राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक पेश किए जाने से ठीक पहले उठाया है।
संजय सिंह ने कहा- मैंने मलाई खिलाई है
डॉ. संजय सिंह कांग्रेस छोड़ने की घोषणा करने के दौरान अमर उजाला के सवाल से रूबरू हुए। अमर उजाला ने डॉ. संजय सिंह से पूछा कि 40 साल तक उन्होंने जिस पार्टी के सुनहरे दिन देखे, मलाई खाई, अब उसे अचानक किस कारण से छोड़ रहे हैं? सवाल के जवाब में संजय सिंह ने कहा कि 40 साल का राजनीतिक जीवन अभी तक जिया है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी भी किसी से मलाई नहीं खाई, बल्कि मलाई खिलाई है। संजय सिंह ने कांग्रेस छोडऩे का कारण भी बताया।
क्यो छोड़ दी कांग्रेस?
संजय सिंह का कहना है कि कांग्रेस दिशाहीन पार्टी हो गई है। महीने भर से अधिक समय से पार्टी का अध्यक्ष बनाने की मशक्कत हो रही है। इसे बनाएंगे, उसे बनाएंगे...चल रहा है। यह एक रेडारलेस पार्टी हो गई है। राजनीति में डायलॉग और संवाद की निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन संजय सिंह का कहना है कि नेतृत्व के संकट से जूझ रही पार्टी इसका सर्वथा अभाव है। इसलिए वह भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश की जरूरतों को समझते हुए कांग्रेस पार्टी की सदस्यता और राज्यसभा से इस्तीफा दे रहे हैं।
क्यों भाजपा अच्छी लग रही है?
संजय सिंह का कहना है कि देश की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया है। वह देश ही नहीं विदेश में भी काफी लोकप्रिय नेता है। देश का प्रजातंत्र इस समय उन्हें भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित लग रहा है। इन्ही प्रजातांत्रिक मूल्यों और देश तथा अमेठी की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को देखते हुए वह बुधवार 31 जुलाई को भाजपा की सदस्यता लेने जा रहे हैं।
क्या हैं संजय सिंह के भाजपा में जाने के मायने?
संजय सिंह की राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इस तरह से संजय सिंह के राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद भाजपा को तीन तलाक जैसे विधेयक को राज्यसभा में पारित कराने में थोड़ी सहूलियत रहेगी। अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष को चुनाव में हराकर स्मृति ईरानी सांसद चुनी गई हैं। अमेठी की विधायक डा. संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह हैं। गरिमा को यह सफलता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर मिली है और वह डा. संजय सिंह के पुरजोर विरोध के बावजूद 2017 में विधानसभा चुनाव जीत गई।
डा. संजय सिंह खुद सुल्तानपुर से लोकसभा का चुनाव लड़े थे और चुनाव हारे ही नहीं थे, बल्कि तीसरे नंबर पर थे। इस तरह से संजय सिंह का कोई विशेष जनाधार नहीं है, लेकिन भाजपा के लिए उनके चेहरे का क्षेत्र में राजनीतिक महत्व है। कांग्रेस पार्टी को इसी महत्व को समझते हुए लगातार संजय सिंह को महत्व देती रही है। इस तरह से संजय सिंह के कांग्रेस छोडऩे को पार्टी और खासकर गांधी नेहरू परिवार के लिए झटका माना जा रहा है।