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Sandeshkhali: संदेशखाली से कन्हैयालाल हत्याकांड जैसा असर होने की उम्मीद, प्रधानमंत्री उठा सकते हैं ये मुद्दा

Fri, 01 Mar 2024 03:55 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 01 Mar 2024 03:55 PM IST
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सार
चुनावी यात्राओं के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं संदेशखाली मुद्दे को उठा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान कन्हैयालाल हत्याकांड का मामला जोरशोर से उठाया था, जिससे पूरे राजनीतिक समीकरण पलट गए थे। माना जा रहा है कि भाजपा वही रणनीति पश्चिम बंगाल में भी अपना सकती है
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Sandeshkhali is expected to have an impact like Kanhaiyalal murder case, PM Modi can raise this issue
Sandeshkhali: Shahjahan Sheikh - फोटो : Amar Ujala/ Rahul Bisht

विस्तार

भाजपा का अनुमान है कि संदेशखाली मुद्दे का पश्चिम बंगाल में कन्हैयाल हत्याकांड जैसा असर हो सकता है। कन्हैयालाल हत्याकांड के कारण राजस्थान में मतदाताओं का पूरी तरह ध्रुवीकरण हो गया था और बेहतर कामकाज के बाद भी अशोक गहलोत को करारी हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा का अनुमान है कि इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी संदेशखाली कांड ममता बनर्जी सरकार पर भारी पड़ सकता है। 55 दिनों तक शाहजहां शेख पर कोई कार्रवाई न होने के कारण लोग ममता बनर्जी सरकार से खासे नाराज हैं और इसे एक वर्ग विशेष के तुष्टिकरण से जोड़कर देख रहे हैं।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि लोग संदेशखाली घटनाओं को 1980 के दशक में घटी कश्मीर की घटनाओं से जोड़कर भी देख रहे हैं, जहां हिंदू महिलाओं से इसी तरह की अशोभनीय घटनाएं घटी थीं। भाजपा का मानना है कि लोगों की यह नाराजगी लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस पर भारी पड़ सकती है।  

इस मुद्दे पर लोगों के आक्रोश को देखते हुए भाजपा इस पर पूरी तरह आक्रामक हो गई है। उसके कई नेता लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। भाजपा के कई केंद्रीय मंत्री और संगठन के बड़े पदाधिकारी जल्द ही संदेशखाली की यात्रा कर इस मामले को और तेजी देने का काम कर सकते हैं। भाजपा इस मामले को दिल्ली-बंगाल सहित पूरे देश में उठाने की रणनीति बना रही है।

माना जा रहा है कि चुनावी यात्राओं के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मुद्दे को उठा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान कन्हैयालाल हत्याकांड का मामला जोरशोर से उठाया था, जिससे पूरे राजनीतिक समीकरण पलट गए थे। माना जा रहा है कि भाजपा वही रणनीति पश्चिम बंगाल में भी अपना सकती है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पकड़ रखने वाले पत्रकार सांतनु मुखर्जी के अनुसार, संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख द्वारा हिंदू समुदाय की महिलाओं के साथ हुए अत्याचार की बात पूरे पश्चिम बंगाल में फैलती जा रही है। अब संदेशखाली की तरह राज्य में कुछ अन्य मामले भी सामने आ रहे हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने लोगों की जमीन हड़प ली हैं और उन्हें स्थानीय प्रशासन से प्रताड़ित किया जा रहा था।

कुछ स्थानों से हिंदू समुदाय के श्रमिकों के पलायन करने की खबरों ने भी राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। यही कारण है कि इस मुद्दे का राजनीतिक असर होने की आशंका से राज्य सरकार को अपनी गलती का आभास हो गया है। शाहजहां शेख के मामले पर ममता बनर्जी के बदले सुर भी यह बताते हैं कि उन्हें भी इस मामले में अपनी गलती का एहसास हो गया है।

राज्य में मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग 30 फीसदी है। यह आबादी कई लोकसभा क्षेत्रों और विधानसभा क्षेत्रों को अकेले दम पर प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि वामपंथी दलों का शासन रहा हो, या तृणमूल कांग्रेस का, किसी के लिए भी मुस्लिमों की उपेक्षा करना संभव नहीं रह गया है।

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को लगभग 40 फीसदी हिंदू मतदाताओं का वोट मिला था। यदि इस चुनाव में यह आंकड़ा थोड़ा भी बढ़ जाता है, तो चुनाव परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं। वहीं, मुस्लिम समुदाय का वोट विधानसभा चुनाव में पूरी तरह ममता बनर्जी के साथ एकजुट हो गया था। यदि एक बार फिर ऐसा होता है तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस और वामदलों को हो सकता है।

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