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Samyukt Kisan Morcha: यूपी-बंगाल चुनाव का मॉडल फिर दोहराएंगे किसान, आठ जून को मोर्चा की बैठक में होगा फैसला

Thu, 02 Jun 2022 07:02 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 02 Jun 2022 07:02 PM IST
सार

संयुक्त किसान मोर्चा में देश के 250 से ज्यादा किसान संगठन शामिल हैं, लेकिन इस बैठक में लगभग 40 शीर्ष किसान संगठनों को ही आमंत्रित किया गया है। सभी किसान संगठनों से केवल एक सदस्य को ही बुलाया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है, जिससे बैठक में चर्चा के स्तर की गंभीरता बनी रहे...

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Samyukt Kisan Morcha: Farmers organisations will meet again on June 8, demanding for minimum support price for crops
संयुक्त किसान मोर्चा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के पहले बड़ा आंदोलन खड़ा कर किसानों ने केंद्र सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेने पर मजबूर कर दिया था। उसी मॉडल को अपनाते हुए आगामी विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले किसान एक बार फिर एमएसपी की मांग करते हुए सड़कों पर उतर सकते हैं। इसके बारे में अंतिम निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा की आठ जून को दिल्ली में होने वाली बैठक में लिया जा सकता है।

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संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का मानना है कि केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेते हुए एमएसपी पर कमेटी गठित कर इसके लिए नियम-कानून बनाने की बात कही थी, लेकिन इस मामले पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों को लगता है कि सरकार उन्हें फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के प्रति गंभीर नहीं है। कमेटी के बहाने केवल मामले को टालने की कोशिश की गई है। लेकिन किसान अब इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई किये जाने की मांग करेंगे।

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किसानों में एकता बनाये रखने पर चिंतन

जानकारी के मुताबिक संयुक्त किसान मोर्चा में देश के 250 से ज्यादा किसान संगठन शामिल हैं, लेकिन इस बैठक में लगभग 40 शीर्ष किसान संगठनों को ही आमंत्रित किया गया है। सभी किसान संगठनों से केवल एक सदस्य को ही बुलाया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है, जिससे बैठक में चर्चा के स्तर की गंभीरता बनी रहे। पिछली बैठक में किसानों के आपसी मतभेद गहरा गए थे, जिससे अप्रिय स्थिति उतपन्न हो गई थी। इस बैठक में किसान संगठनों के बीच एकता बनाये रखने के मुद्दे पर भी चर्चा की जाएगी।

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किसान नेता ने बताया- नहीं पूरी हुई अहम मांग

बैठक के विषय में पूछे जाने पर संयुक्त किसान मोर्चा नेता सुनीलम ने अमर उजाला को बताया कि उनकी अभी तक वह सबसे प्रमुख मांग पूरी नहीं हुई है, जिसे लेकर आंदोलन शुरू किया गया था। जब तक देश के सभी किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने पर कानून नहीं बन जाता, उनकी लड़ाई अधूरी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। इसके साथ किसान संगठनों में एकता और आगामी रणनीति को लेकर भी विचार-विमर्श किया जा सकता है।

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