कश्मीर का रण: कभी पांच तो कभी 25 हजार से कम पर सिमटी सपा, इस बार क्या है जो घाटी से मैदान को लिया निशाने पर
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विस्तार
समाजवादी पार्टी जम्मू कश्मीर में लगातार विधानसभा के चुनाव लड़ती आई है। लेकिन पार्टी यहां पर कभी भी अपनी मजबूत हैसियत नहीं बना सकी। आलम यह रहा कि कभी समाजवादी पार्टी के सभी प्रत्याशी मिलकर पांच हजार से कम वोटो पर सिमट कर अपनी जमानत गवा बैठे। तो कभी सभी प्रत्याशी मिलकर भी 25 हजार वोटो का आंकड़ा भी नहीं पार कर सके। अब 10 साल बाद एक बार फिर जब घाटी में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं तो समाजवादी पार्टी अपनी नई रणनीति के लिहाज से प्रत्याशियों को मैदान में उतार चुकी है। जम्मू कश्मीर में पार्टी के नेताओं का दावा है कि तीसरे चरण से पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव कश्मीर में रैली भी कर सकते हैं। सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि समाजवादी पार्टी ने घाटी में चुनाव लड़कर न सिर्फ कश्मीर में बल्कि मैदानी राज्यों मे "एम फैक्टर" को साधने की पूरी सियासी बिसात बिछाई है।
पूरे देश में लोकसभा सीटों के लिहाज से समाजवादी पार्टी इस वक्त तीसरे नंबर पर है। यही वजह है कि पार्टी के इस प्रदर्शन से उत्साहित समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव एक बार फिर जम्मू कश्मीर के सियासी मैदान में प्रत्याशियों के साथ उतरे हैं। हालांकि जम्मू कश्मीर में समाजवादी पार्टी का अभी तक के चुनाव के रिकॉर्ड के मुताबिक कोई भी सियासी आधार नहीं बन पाया है। बावजूद इसके समाजवादी पार्टी ने यहां के चुनाव में न सिर्फ ताल ठोंकी है बल्कि अपने कोर वोटरों में से एक मुस्लिम समुदाय को एक संदेश देने के लिए नैरेटिव सेट किया है।
केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने 2008 और 2014 में भी चुनाव लड़ा था। आंकड़ों के मुताबिक 2008 में जम्मू कश्मीर की 36 विधानसभा सीटों पर मुलायम सिंह यादव की अगवाई में चुनाव लड़ा गया था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता था। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक समाजवादी पार्टी को सभी 36 सीटों पर महज 24194 वोट ही मिल पाए थे। सभी प्रत्याशियों की जमानत जप्त हो गई थी। 2008 के चुनाव में पड़े कुल वोटों का समाजवादी पार्टी के हिस्से में महज 0.61 फीसदी वोट ही आया था।
इसी तरह ठीक 10 साल पहले 2014 में भी समाजवादी पार्टी ने जम्मू कश्मीर में अपनी पार्टी के विस्तार के लिहाज से किस्मत आजमाई थी। लेकिन इस चुनाव में भी समाजवादी पार्टी 2008 के चुनाव जैसा ही प्रदर्शन कर पाई थी। आंकड़ों के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने 2014 में घाटी की सात विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। इन सभी सीटों पर 4985 वोट ही पार्टी के सभी प्रत्याशियों को मिल पाए थे। 0.10 फीसदी वोट ही सभी प्रत्याशियों ने मिलकर पूरे चुनाव का अपने खाते में किया था। इस चुनाव में भी समाजवादी पार्टी के सभी प्रत्याशियों की जमानत नहीं बची थी।
अब एक बार फिर समाजवादी पार्टी जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनाव में है। दूसरे और तीसरे चरण में समाजवादी पार्टी की कड़ी परीक्षा होनी है। समाजवादी पार्टी दूसरे और तीसरे चरण के चुनाव में 20 सीटों पर मैदान में है। दूसरे चरण में जहां समाजवादी पार्टी कश्मीर क्षेत्र की 10 सीटों और जम्मू क्षेत्र की 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वही तीसरे चरण के लिए घाटी की पांच सीटों पर समाजवादी पार्टी चुनावी मैदान में है। दूसरे चरण के लिए जम्मू कश्मीर में 25 सितंबर को चुनाव होना है। तीसरे चरण के लिए 1 अक्टूबर को चुनाव होगा।
जम्मू कश्मीर में समाजवादी पार्टी के नेता अब्दुल रहमान का दावा है कि इस बार के चुनाव में समाजवादी पार्टी हर चुनाव की अपेक्षा बेहतर करेगी। रहमान कहते हैं कि योजना तो यह भी है कि तीसरे चरण के चुनाव से पहले घाटी में सपा मुखिया अखिलेश यादव की एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाए। उनका दावा है कि इस इस बार जिस तरीके से पूरे देश में तीसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी समाजवादी पार्टी बनकर उभरी है। इसका असर जम्मू कश्मीर के चुनाव में भी दिखना तय माना जा रहा है।
हालांकि सियासी जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव ने जम्मू कश्मीर में अपने प्रत्याशियों को उतार कर बड़ी रणनीति के लिहाज से पूरा सियासी रोड में तैयार किया है। राजनीतिक विश्लेषक और घाटी की सियासत को करीब से समझने वाले नसीर बट कहते हैं कि दरअसल अखिलेश यादव ने बीते दो चुनावों के परफॉर्मेंस के बाद भी जम्मू कश्मीर में चुनाव लड़ रहे हैं। दरअसल वह अपने कोर वोट बैंक मुस्लिम समुदाय को एक संदेश देने की कोशिश में हैं। वह कहते हैं कि अखिलेश यादव ने जिस तरीके से घाटी में प्रत्याशी उतारे हैं उसका सियासी मतलब स्पष्ट है। पहला तो यही है कि देश की तीसरी सबसे बड़ी सियासी पार्टी होने के चलते वह जम्मू कश्मीर में चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश समेत महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय को भी एक बड़ा संदेश अखिलेश ने दिया है कि वह उस हर जगह से चुनाव लड़ेंगे जहां पर मुसलमानों की बड़ी हिस्सेदारी होगी।
नासिर बट कहते हैं कि इसका असर कितना होगा यह तो नहीं कहा जा सकता। लेकिन पार्टी के रणनीतिकार अपना एक नैरेटीव जरूर इस तरह से सेट कर सकते हैं। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए पूरा जोर लगा रही है। घाटी में मुस्लिम वोटर की संख्या ज्यादा होने के चलते समाजवादी पार्टी ने यहां पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। ताकि राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए जो दायरा चाहिए वह मिलना शुरू हो सके।