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रफ्तार: वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए सेल और आरआईएनएल बनाएगी पहिए, 400 ट्रेनों के लिए 2.5 लाख पहिए बनाने का लक्ष्य  

Tue, 17 May 2022 08:47 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 17 May 2022 08:47 PM IST
सार

इन पहियों का निर्माण स्टील के एक बड़े ठोस टुकड़े से किया जाता है जिसे अत्यधिक तापमान पर गर्म किया जाता है और आकार लेने के लिए दबाव डाला जाता है।

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SAIL, RINL to make wheels for Vande Bharat Express trains, more to come from Malaysia, US, China
वंदे भारत एक्सप्रेस - फोटो : पीटीआई

विस्तार

रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए पहियों के निर्माण के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड को अनुबंधित किया है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उनके अनुसार, इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगले तीन वर्षों में निर्मित होने वाली 400 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के 2.5 लाख पहियों में देरी न हो। एक सूत्र ने कहा कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के दुर्गापुर स्टील प्लांट ने पहले ही रेलवे के एलएचबी कोचों के लिए 45,000 पहियों का उत्पादन किया है और अब वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के पहियों के निर्माण के लिए स्वीकृत डिजाइन का उपयोग करेगा।

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रायबरेली इकाई में ऐसे पहियों का निर्माण होगा
इसके अलावा राज्य के स्वामित्व वाली स्टील निर्माता राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) भी हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी रायबरेली इकाई में ऐसे पहियों का निर्माण करेगी। यह पहले ही लगभग 700 ऐसे पहियों का निर्माण कर चुका है, लेकिन अब वे वंदे भारत डिजाइन मॉडल पर ध्यान केंद्रित करेंगे। ये इकाइयां पहले से ही ऐसे पहिये बना रही थीं, लेकिन हमारे पास समय सीमा में इतने निर्माण करने की क्षमता नहीं थी। वे अन्य देशों से भी आने वाले पहियों के साथ हमारे बैकअप होंगे। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई देरी न हो। सूत्रों ने कहा कि रायबरेली में आरआईएनएल इकाई की सालाना एक लाख पहियों की उत्पादन क्षमता है।
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इन पहियों का निर्माण स्टील के एक बड़े ठोस टुकड़े से किया जाता है जिसे अत्यधिक तापमान पर गर्म किया जाता है और आकार लेने के लिए दबाव डाला जाता है। सूत्रों ने कहा कि यह थर्मल चक्र सुनिश्चित करता है कि ये पहिए अन्य प्रकारों की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं और 100 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलने वाली ट्रेनों में फिट होते हैं। रेलवे ने अगले तीन साल के लिए मलेशिया, अमेरिका और चीन से भी पहियों का ऑर्डर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि पिछले महीने हांगकांग इंटरनेशनल लिमिटेड को 39,000 सॉलिड फोर्ज्ड व्हील्स (रफ टर्न) के लिए 170 करोड़ रुपये का टेंडर दिया गया था। अगस्त में होने वाली दो ट्रेनों के ट्रायल के लिए 128 पहियों की जरूरत थी। रोमानिया से चेन्नई और फिर हाल ही में हैदराबाद भेजा गया।
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सूत्रों ने कहा कि रेलवे पहियों के निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए फोर्जिंग एजेंसियों के साथ गठजोड़ करने की प्रक्रिया में है। 2022-2023 के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्ताव दिया था कि अगले तीन वर्षों में 400 नई वंदे भारत ट्रेनों का विकास और निर्माण किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित समयसीमा के अनुसार, 15 अगस्त 2023 तक ऐसी 75 ट्रेनों को चलाने का लक्ष्य है।

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