सहारा को भरना होगा 3.3 करोड़ का जुर्माना
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गुड़गांव के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में निवेशकों को समय पर फ्लैटों का कब्जा न देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईसीसीएल) को 3.3 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने एसआईसीसीएल को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में साढ़े तीन करोड़ रुपये जमा करने का निदेश दिया है। इससे पहले एसआईसीसीएल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पीठ से कहा कि गुड़गांव के ‘सहारा ग्रेस’ प्रोजेक्ट में देरी नहीं हुई है।
प्रोजेक्ट समय पर बनकर तैयार हो गया था, लेकिन प्रक्रियागत कारणों से निवेशकों को फ्लैट पर कब्जा मिलने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि फ्लैटों पर कब्जा दिया जा चुका है और लोग उसमें रह भी रहे हैं। हालांकि पीठ ने एसआईसीसीएल को रियायत देने से इनकार करते हुए 3.3 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया। पीठ अब इस मामले पर छह हफ्ते बाद सुनवाई करेगी।
अप्रैल 2008 से जनवरी 2009 के बीच लोगों को फ्लैटों पर कब्जा मिला
एसआईसीसीएल ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। निवेशकों को देरी से फ्लैट देने पर 2015 में आयोग ने एसआईसीसीएल से सहारा ग्रेस कंज्यूमर ग्रिवांस एसोसिएशन को 12 फीसदी के हिसाब से मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही आयोग ने निवेशकों को होने वाली मानसिक परेशानी को देखते हुए फ्लैट के खरीदारों को 2 लाख रुपये देने का आदेश दिया था।
वर्ष 2003 में सहारा ग्रेस प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी और अप्रैल 2006 से मार्च 2007 के बीच निवेशकों को कब्जा देना था। लेकिन ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट में देरी के कारण एसआईसीसीएल तय समय में फ्लैटों का कब्जा देने में नाकाम रही। अप्रैल 2008 से जनवरी 2009 के बीच लोगों को फ्लैटों पर कब्जा मिला।