सबरीमाला: भारी विरोध के बीच वापस लौटीं दर्शन करने पहुंची दो महिलाएं
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भगवान अयप्पा के मंदिर तक पहुंचने के लिए सबरीमला पहाड़ी की चढ़ाई करने की कोशिश करने वाली रजस्वला आयु वर्ग की दो महिलाओं को श्रद्धालुओं के निरंतर विरोध प्रदर्शन के चलते दर्शन किए बिना ही लौटने पर मजबूर होना पड़ा। बिंदु और कनकदुर्गा का यह प्रयास चेन्नई के संगठन ‘मानिथि’ की 11 महिला कार्यकर्ताओं के मंदिर पहुंचने की, एक दिन पहले की असफल कोशिश के बाद हुआ है।
सुबह करीब चार बजे पंबा पहुंचने वाली दोनों महिलाओं को ‘सन्निधानम’ (मंदिर परिसर) से एक किलोमीटर पहले अप्पाचीमेदु और मराकूटम में श्रद्धालुओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस की सुरक्षा में आगे बढ़ रही महिलाओं को रोकने के लिए अयप्पा श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए और करीब एक घंटे तक पुलिस के साथ भी उनकी नोंकझोंक चली।
पुलिस ने 'वापस जाओ' चिल्ला रहे और अयप्पा मंत्रोच्चारण कर रहे श्रद्धालुओं को हटाने की कोशिश की लेकिन किसी भी सूरत में पीछे हटने को नहीं तैयार अशांत श्रद्धालुओं के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया। छोटे बच्चों समेत प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए और स्थिति अनियंत्रित हो जाने के भय से पुलिस ने महिलाओं को लौट जाने की सलाह दी।
इन महिलाओं को इससे पहले श्रद्धालुओं ने सबरीमला के रास्ते में पड़ने वाले अप्पाचीमेदु में रोक दिया था जिन्हें बाद में पुलिस ने हटा दिया। भाजपा ने भी दो इन महिलाओं के घर के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कनकदुर्गा के बेहोश हो जाने की खबरों के बीच बिंदु ने संवाददाताओं को बताया कि उनको रोकने के लिए झूठ बोला गया और उनके साथ कुछ भी ऐसा नहीं हुआ।
बिंदु ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जबरन उन्हें मंदिर जाने से रोका। महिला ने कहा कि उन्होंने पुलिस की सुरक्षा नहीं मांगी थी लेकिन सुरक्षा मुहैया कराना उनकी जिम्मेदारी है क्योंकि यह उच्चतम न्यायालय का फैसला है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद से अब तक मंदिर में 10-50 आयु वर्ग की कोई भी महिला प्रवेश नहीं कर पाई है। इस आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक रूप से रोक लगी हुई थी।
सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत देने वाले 28 सितंबर के फैसले को लेकर केरल में श्रद्धालुओं एवं भाजपा ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया है। वार्षिक तीर्थयात्रा का पहला चरण 27 दिसंबर को खत्म होने वाला है और पिछले कुछ दिनों से यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ नजर आ रही है।
रविवार को 11 महिलाओं के एक समूह ने जंगल के रास्ते से मंदिर के अंदर जाने की कोशिश की थी। 50 साल से उम्र वाली इन महिलाओं को प्रदर्शनकारियों ने मंदिर में प्रवेश करने नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों के भारी विरोध को देखते हुए उन्हें पुलिस की मौजूदगी में मंदिर से पांच किलोमीटर पहले स्थित बेस कैंप से बाहर निकाला गया था। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है।
11 महिलाओं के समूह में से एक महिला थिलाकावाथी का कहना था, 'हम तब तक प्रदर्शन करेंगे जब तक हमें मंदिर के अंदर भगवान अयप्पा के दर्शन नहीं करने दिया जाता। पुलिस ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमें वापस जाने को कहा लेकिन हम नहीं जाने वाले। हमारे समूह के अन्य सदस्य भी जल्द आने वाले हैं। पंबा के स्थानीय मंदिर के पुजारी हमें समर्थन नहीं दे रहे और परंपरा के हिसाब से हमें पूजा नहीं करने दी जा रही है।'
बता दें सबरीमाला मंदिर में 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के आने पर बहुत पुराने समय से प्रतिबंध लगा हुआ है। लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए सभी महिलाओं पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था। 28 सितंबर को आए इस फैसले के बाद से ही कई महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहीं। उसी दिन से यहां अदालत के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा है।