S Jai Shankar: बिना नाम लिए पाकिस्तान पर जयशंकर ने साधा निशाना, चीन के साथ व्यापार असंतुलन पर कही यह बात
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद भारत-पाकिस्तान संबंधों का मूलभूत मुद्दा है, जिससे कोई बच नहीं सकता है। उन्होंने आगे कहा कि हम मूलभूत समस्याओं से इनकार नहीं कर सकते हैं।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि कोई भी ऐसा देश न तो अपनी समस्याओं से बाहर निकल सकता और न ही समृद्ध हो सकता है, जिसका मूल उद्योग आतंकवाद है। आतंकवाद भारत-पाकिस्तान संबंधों का मूलभूत मुद्दा है। इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता। हम मूलभूत समस्याओं से भी मुंह नहीं मोड़ सकते हैं। कोई भी बड़ा फैसला लेते समय मुझे यह देखना होता है कि इस पर जनता क्या राय रखती है। यह बात उन्होंने बृहस्पतिवार को सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम जी-20 फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स को संबोधित करते हुए कही।
जयशंकर ने कहा, डाटा सुरक्षा और डाटा गोपनीयता डिजिटल दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। जी-20 बैठक के दौरान इससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। हर बार जब हम कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन देखते हैं, हम कुछ सीखते हैं, दूसरों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, लेकिन यह सिर्फ एक पहलू है। दूसरा पहलू यह है कि इसी के जरिए कोई हम पर भी नजर रख रहा है।
कोई सहिष्णुता को हमारी कमजोरी न समझे
जयशंकर ने कहा, आज भारत की छवि एक ऐसे देश की है, जो अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। भारत एक सहिष्णु और धैर्यवान देश है। यह एक ऐसा देश नहीं है, जो दूसरे देशों से हमेशा विवाद करने पर उतारू रहता है, लेकिन यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि कोई भी भारत को धक्का नहीं दे सकता है और न वह अपनी सीमारेखा किसी को लांघने देगा। आज भारत इस बात को सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी हमारी सहिष्णुता को हमारी कमजोरी न समझे।
उत्तरी सीमाओं पर हमारी परीक्षा
विदेश मंत्री ने कहा, कुछ वर्षों में हमारी पश्चिमी सीमा पर कई प्रयोग कई गए हैं। अब चीजें थोड़ी अलग हैं। हर कोई इससे सहमत होगा। 2016 और 2019 में कुछ चीजें घटित हुई थीं। उत्तरी सीमाओं पर हमारी लगातार परीक्षा हो रही है। भारत इस परीक्षण में कैसे सफल होता है, यह हमारे संघर्ष करने की क्षमता को दर्शाएगा।
चीन के साथ व्यापार असंतुलन के लिए भारत का उद्योग जगत भी जिम्मेदार
जयशंकर ने कहा, चीन के साथ व्यापार असंतुलन के लिए सरकार के साथ भारत का उद्योग जगत भी जिम्मेदार है। उद्योग जगत ने सही समय पर उत्पादन का आधारभूत ढांचा विकसित नहीं किया। हमारी सरकार आत्मनिर्भर भारत जैसी नीतियां लाकर इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर विदेशी निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। कहा, वैश्विक अर्थव्यवस्था महामारी के प्रभाव से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है।