फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rustomji Memorial Lecture: The work of fencing the border will be completed this year, Shah said- infiltration and smuggling will stop

रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान: सीमा पर बाड़ लगाने का काम इसी साल होगा पूरा, शाह बोले-रुकेगी घुसपैठ, तस्करी

Sat, 17 Jul 2021 10:40 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 17 Jul 2021 10:40 PM IST
सार

देश की करीब 7500 किमी लंबी सीमा को सील करने का काम इस साल पूरा हो जाएगा। गृह मंत्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार के पहले देश की कोई स्वतंत्र रक्षा नीति नहीं थी। 
 

विज्ञापन
Rustomji Memorial Lecture: The work of fencing the border will be completed this year, Shah said- infiltration and smuggling will stop
गृह मंत्री अमित शाह। - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को जोर देकर कहा कि भारत की करीब 7,500 किलोमीटर लंबी सीमा पर इस साल के अंत तक बाड़ लगाने का काम पूरा कर उसे सील कर दिया जाएगा ताकि इन स्थानों से घुसपैठ और हथियारों व मादक पदार्थों की तस्करी नहीं हो सके।

विज्ञापन


गृहमंत्री ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने से पहले देश की कोई स्वतंत्र रक्षा नीति थी ही नहीं। जो नीति थी भी वह विदेश नीति से प्रभावित थी। मोदी सरकार आने के बाद देश की रक्षा नीति स्वतंत्र हुई।
विज्ञापन


नौ साल बीएसएफ प्रमुख रहे थे रुस्तमजी
शाह ने यह बात 'रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान' को संबोधित करते हुए कही। इसका आयोजन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अपने पहले महानिदेशक केएफ रुस्तमजी की याद में करता है। ब्रिटिश शासन के दौरान इम्पीरियल पुलिस के 1938 बैच के अधिकारी रुस्तमजी ने नौ साल तक बीएसएफ का नेतृत्व किया। वर्ष 2003 में उनका निधन हुआ था।
विज्ञापन
विज्ञापन


शहीद जवानों को वीरता पदक प्रदान किए
गृह मंत्री शाह ने इस मौके पर सीमा की रक्षा में लगे बल के सेवारत और ड्यूटी के दौरान शहीद हुए जवानों के परिवारों को वीरता पदक भी प्रदान किए। शाह ने कहा,  'मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि वर्ष 2022 से हमारी सीमा पर कोई स्थान बिना बाड़ नहीं होगा।' 

तीन फीसदी हिस्सा बिना बाड़ का
शाह ने कहा कि इस समय देश की सीमा का तीन प्रतिशत हिस्सा बिना सुरक्षा दीवार के है और यह आतंकवादियों की घुसपैठ और सीमा पर होने वाले अपराधों जैसे हथियारों, गोलाबारूद और मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने में 'बड़ी खाई' है। शाह ने कहा कि मोदी सरकार इस अंतर को प्रशासनिक बाधाएं सुलझाने और यहां तक पड़ोसी देशों से बातचीत कर पाट रही है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि सीमा सुरक्षा (सुनिश्चित) ही राष्ट्रीय सुरक्षा (सुनिश्चित करना) है। शाह ने कहा कि सुरक्षा पर बाड़बंदी करने के लिए 'नए मॉडल' को विकसित किया जा रहा है ताकि उन्हें काटा या तोड़ा नहीं जा सके।

देश की कोई सुरक्षा नीति नहीं थी

गृहमंत्री ने मोदी सरकार की रक्षा नीति के बारे में बात की। उन्होंने कहा, 'मैं अकसर सोचता था कि क्या इस देश की सुरक्षा नीति है या नहीं? नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने तक हमारे पास कोई स्वतंत्र सुरक्षा नीति नहीं थी। वो हमेशा विदेश नीति से प्रभावित रहती थी या फिर विदेश नीति सुरक्षा नीति पर अतिव्यापी (ओवरलैप) होती थी।' उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश को स्वतंत्र सुरक्षा नीति मिली। शाह ने कहा, 'हमारा विचार है कि सभी के साथ शांतिपूर्ण संबंध हों, लेकिन अगर कोई हमारी सीमाओं को छेड़ता है, अगर कोई हमारी संप्रभुता को चुनौती देता है, तो हमारी सुरक्षा नीति की प्राथमिकता है कि ऐसी कोशिशों को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए।?

उन्होंने कहा कि सुरक्षा नीति 'बड़ी उपलब्धि' है क्योंकि देश ऐसी सदृढ़ योजना चाहता है। गृहमंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि इसके (सुरक्षा नीति) बिना न तो देश प्रगति कर सकता है और न ही लोकतंत्र समृद्ध हो सकता है। प्रधानमंत्री ने यह बड़ा काम किया है। मुझे उदाहरण देने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह सभी को पता हैं। उन्होंने कहा कि नीति को उनकी सरकार ने जमीन पर क्रियान्वित किया।
 

ड्रोन रोधी तकनीक पर काम जारी

गृहमंत्री ने कहा कि भारत जल्द ही स्वदेशी ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकी का विकास करने के लिए काम कर रहा है,इस पर रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) और अन्य एजेंसियां काम कर रही हैं।
उनकी यह टिप्पणी पिछले महीने पहली बार जम्मू स्थित वायुसेना स्टेशन पर ड्रोन से हुए हमने की पृष्ठभूमि में आई है। इस हमले को दो ड्रोन ने अंजाम दिया जिसमें एक इमारत के हिस्से को नुकसान पहुंचा और दो वायुसैनिक घायल हो गए थे।

3600 किमी लंबी सीमा सड़क बनाई
उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 से 2014 के बीच 3,600 किलोमीटर लंबी सीमा सड़क बनाई गई थी जबकि वर्ष 2014 से 2020 (मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर) इसमें साढ़े तीन गुना वृद्धि देखी गई और 4,764 किलोमीटर लंबी ऐसी सड़कें बनाई गई। इसके लिए बजट को 23 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 44 हजार करोड़ रुपये किया गया। वर्ष 2014 से 2020 के बीच कुल 14,450 मीटर लंबे पुलों का निर्माण किया गया जबकि वर्ष 2008 से 2014 के बीच निर्मित पुलों की कुल लंबाई 7,270 मीटर थी।

शाह ने बताया कि चीन से लगती सीमा पर कटाई कर सड़क निर्माण की गति 470 किलोमीटर प्रतिवर्ष है जबकि पहले हर साल 230 किलोमीटर ही ऐसी सड़के बन पाती थी। उन्होंने बताया कि चीन-भारत सीमा पर सरकार ने 32 और सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी है जिसकी कुल लंबाई 683 किलोमीटर है।

कार्यक्रम के दौरान बीएसएफ के महानिदेशक राकेश अस्थाना ने बताया कि बल ने गत एक साल में पश्चिमी सीमा पर 61 बार ड्रोनों को देखा और चार सुरंगों का पता लगाया। गौरतलब है कि बीएसएफ में 2.65 लाख जवान हैं जो बांग्लादेश और पाकिस्तान से लगती करीब 6,300 किलोमीटर लंबी भारत की सीमा की रक्षा करते है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed