रूस-यूक्रेन जंग: 'फॉग ऑफ वॉर' में 48 घंटे या 96 घंटे, जेलेंस्की की मायूसी में कितनी सफल होगी 'हाइब्रिड गुरिल्ला वॉरफेयर'
सुरक्षा विशेषज्ञ ले. जन. राकेश शर्मा (रिटायर्ड) के मुताबिक, यूक्रेन इतनी जल्दी हथियार नहीं डालेगा। वह एसएस-26 या एसएस-32 सिस्टम से परिचित है। कीव, खारकीब आदि जगहों पर शॉर्ट मिसाइल अटैक का जवाब दे सकता है। एस-300 किलोमीटर रेंज वाला एयर डिफेंस सिस्टम उसके पास नहीं है। जब नाटो को यह सब मालूम था तो उसने यूक्रेन को अच्छे हथियार क्यों नहीं मुहैया कराए...
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रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग को लेकर अब इस सवाल पर चर्चा होने लगी है कि ये लड़ाई '48 घंटे' चलेगी या '96 घंटे'। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की कह चुके हैं कि 96 घंटे में लोहे की दीवार गिर जाएगी। कई रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लड़ाई के दौरान राष्ट्रपति जेलेंस्की अपनी सेना का मनोबल गिरा रहे हैं। 'फॉग ऑफ वॉर' के बीच अभी सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। राष्ट्रपति जेलेंस्की की मायूसी के बीच यूक्रेन आर्मी की खास रणनीति 'हाइब्रिड गुरिल्ला वॉरफेयर' कितनी कारगर हो पाएगी, इस बाबत ठीक से नहीं कहा जा सकता।
रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड ले. जन. संजय कुलकर्णी द्वारा एक मीडिया संस्थान से की गई बातचीत के अनुसार, यूक्रेन पहले जो भी था, वह था। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। रूस कोई एकाएक तो आ नहीं गया है। वह तो पांच-छह माह से लड़ाई के हालात दर्शा रहा था। मौजूदा हालात में यूक्रेन के लिए अगले 48 घंटे बहुत अहम हैं। वह इस अवधि में गिर भी सकता है। ये अलग बात है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की ने 96 घंटे में लोहे की दीवार गिरने की बात कही है। रूस के सामने कोई टिकेगा नहीं। यूक्रेन का मनोबल काफी हद तक गिर चुका है। यूक्रेन पर जब तक रूस पूरा कब्जा नहीं कर लेता, वह मानेगा नहीं। रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों का कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। ये सब तो दिखाने के लिए हैं। वह एक महाशक्ति है। अगर उसने जंग छेड़ी है तो उसे यह भी मालूम है कि कौन उसके साथ होगा और कौन खिलाफ। नाटो की कार्रवाई का उसे अंदाजा है। यूक्रेन का एयर सिस्टम जल्द ही दम तोड़ जाएगा। यूक्रेन की उस वक्त तक तबाही तय है, जब तक वह सरेंडर नहीं कर देता।
'फॉग ऑफ वॉर' में 'हाइब्रिड गुरिल्ला वॉरफेयर'
'फॉग ऑफ वॉर' में बहुत कुछ संभव होता है। यूक्रेन में आज कुछ ऐसा ही चल रहा है। जो दिख रहा है, उसमें यह नहीं मालूम कि टैंक किसका नष्ट हुआ है। कई जगहों पर खड़े टैंकों पर मार्किंग नहीं है। ओडेसा की सड़कों पर टैंक तो हैं, मगर ये सही से कहना कि वे रूस के ही हैं, अभी संभव नहीं है। जंग 96 घंटे चल सकती है और लंबी भी खिंच सकती है। रूस, जल्द से जल्द नतीजा हासिल कर लड़ाई बंद करना चाहता है। राष्ट्रपति जेलेंस्की को अपनी सेना और लोगों का जिस तरह से उत्साह बढ़ाना चाहिए था, वैसा नहीं बढ़ा सके। राष्ट्रपति लगातार बोल रहे हैं कि हम तो अपने लिए अकेले लड़ रहे हैं। सभी से मदद मांग ली है। रूस की सेना अंदर घुस आई है, अब दिक्कत होगी। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन में जॉर्जिया की सेना के अधिकारी और ट्रेनर मौजूद हैं। वे लोगों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्होंने तीन लाख से अधिक लोगों को ट्रेनिंग दी है। ऐसे में लड़ाई लंबी खिंच सकती है। यूक्रेन की 'हाइब्रिड गुरिल्ला वॉरफेयर' रणनीति कितनी कारगर साबित हो पाती है, ये देखने वाली बात है।
यूक्रेन के कई वार तो अभी बाकी हैं
सुरक्षा विशेषज्ञ ले. जन. राकेश शर्मा (रिटायर्ड) के मुताबिक, यूक्रेन इतनी जल्दी हथियार नहीं डालेगा। वह एसएस-26 या एसएस-32 सिस्टम से परिचित है। कीव, खारकीब आदि जगहों पर शॉर्ट मिसाइल अटैक का जवाब दे सकता है। एस-300 किलोमीटर रेंज वाला एयर डिफेंस सिस्टम उसके पास नहीं है। जब नाटो को यह सब मालूम था तो उसने यूक्रेन को अच्छे हथियार क्यों नहीं मुहैया कराए। हाइब्रिड गुरिल्ला वारफेयर की अपनी विशेषता है। यह कितने दिन काम कर पाता है, इस बाबत कुछ सही से नहीं कहा जा सकता।
हालांकि अभी एक संभावना बची है। यूक्रेन अंदर की ओर से रूस को घेर सकता है। यूक्रेन की राजधानी 'कीव' को सुरक्षित रखने की रणनीति नजर नहीं आ रही। यूक्रेन की फोर्स पूर्व में ज्यादा है, जबकि साउथ और नार्थ में कम है। रूसी सेनाएं राजधानी के बाहर हैं। अब देखना ये है कि नाटो ने यूक्रेन को जो ट्रेनिंग दी है, वह कितना काम आ पाती है। टैंक को रोकने और हेलीकॉप्टर गिराने के लिए जो हथियार दिए हैं, वे कितने कारगर हो पाते हैं। रूस का हमला हो गया है, अभी यूक्रेन का होना बाकी है। रूस के लोग भी यूक्रेन पर हमले को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। कल की भविष्णवाणी नहीं की जा सकती है। यूक्रेन को गुरिल्ला लड़ाई लड़नी होगी।