बूचा में रूस का नरसंहार: अमर उजाला से बातचीत में छलका लोगों का दर्द, दास्तां सुन कर कांप उठेगी रुह
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विस्तार
बूचा की जो तस्वीर पूरी दुनिया ने बीते एक-दो दिनों में देखी वह कुछ भी नहीं है। चालीस हजार की आबादी वाले शहर में अब शायद ही कोई ही होगा जो अपने घर में मिलेगा। तकरीबन डेढ़ महीने से जो आतंक रूसी सैनिकों ने मचाया उससे उनका घर-परिवार सब खत्म हो गया। कीव में एक फ़ूड चेन चलाने वाले ओलेक्सी लेपेटिना ने अमर उजाला डॉट कॉम से फ़ोन पर बात की, तो उनकी आवाज में लगातार सिसकियां थीं। वह कहते हैं कि उनकी पत्नी और तीन बेटे-बेटियों का अब तक पता नहीं चला है। वे सभी बूचा के आउटर में बने अमिलीन इलाके में रहते थे।
रूसी सैनिकों ने शहर से खदेड़ा
ओलेंक्सी इस वक़्त अपने एक करीबी रिश्तेदार के साथ पोलैंड में शरण ले चुके हैं। उन्होंने अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत के दौरान कहा कि तीन मार्च को आखिरी बार अपने पत्नी और बच्चे को यह कहकर घर से निकले थे कि तुम लोग अपनी तैयारी रखना। हम लोग बहुत जल्द ही यूक्रेन छोड़कर पोलैंड निकल जाएंगे। क्योंकि रूसी सैनिकों का काफिला बूचा की ओर बढ़ रहा है। ओलेंस्की कहते हैं कि उस दिन के बाद वह वापस न अपने शहर आ पाए और न ही अपने परिवार से मिल सके। वह बताते हैं कि कीव पहुंचने पर उन्हें रूसी सैनिकों ने शहर से खदेड़ दिया। वह चिल्लाते हैं कि उन्हें वापस उनके घर बूचा जाने दिया जाए, लेकिन उनके और उनके जैसे न जाने कितने लोग जो कीव और बूचा के बीच रोज आते-जाते थे, वापस नहीं जाने दिया गया।
वह कहते हैं कि उस रोज तो उनके परिवार वालों से बात हुई, लेकिन उसके बाद से लेकर आज तक उनकी घर वालों से कोई बात नहीं हो सकी। फोन पर वार्तालाप के दौरान वह कहते हैं, जो तस्वीरें आज पूरी दुनिया में दिख रही है उसका अंदेशा तो पहले दिन से ही हम लोगों को हो गया था। वह बताते हैं जितनी तस्वीरें आप देखकर रूस की दरिंदगी का अंदाजा लगा रहे हैं, उससे कई गुना ज्यादा हालात यहां बदतर हैं।
पति और बच्चे को सैनिकों ने मारा
ओलेंस्की के साथ रेस्तरां में काम करने वाले साउथ इंडिया के एन मुरलीधर भी थे। क्योंकि मुरलीधर के एक भाई पोलैंड में पहले से शिफ्ट हो चुके हैं। इसलिए ऐसे हालात में मुरलीधर वापस पोलैंड चले गए और अपने साथ ओलेंस्की को भी ले गए। ताकि वे सुरक्षित रहें। ओलेंस्की से फोन पर पोलैंड से हो रही बातचीत के दौरान बूचा के कुछ और लोगों से भी बात कराई। हीवेन ओकरेयो भी बूचा की रहने वाली हैं। वह बताती हैं कि उनके पति और बच्चे की सैनिकों ने हत्या कर दी। उनके पति एक बैंक में काम करते थे। जबकि बच्चा स्कूल जाना शुरू कर चुका था। हीवेन बताती हैं कि हालात तो बहुत दिनों से कीव और बूचा के बदहाल थे, लेकिन जिस तरीके से सैनिकों ने ताबड़तोड़ हमले करने शुरू किए, उससे उनके शहर के लोगों का बचना संभव ही नहीं है। वह कहती हैं कि वे अपनी एक बेटी को लेकर पोलैंड चली आई हैं, लेकिन अब उनके परिवार में कोई भी शख्स जिंदा नहीं बचा है।
हीरो हैं जेलेंस्की
यूक्रेन के लोगों से बातचीत के दौरान लोगों ने खुल कर कहा कि भले ही उनके राष्ट्रपति एक कॉमेडियन रहे हों, लेकिन आज वह अपने देश के सबसे बड़े हीरो बनकर सामने आए हैं। यूक्रेन के मारियोपोल में टैक्सी ड्राइवर ट्रोकहिम बारबैश कहते हैं कि रूस ने जिस तरीके की कायराना हरकत की है, उसे दुनिया माफ नहीं करेगी। वह कहते हैं कि मारियोपोल से लेकर कीव और बूचा समेत उत्तर और उत्तर पूर्वी इलाके में जो तबाही रूस ने मचाई है उसका तो हिसाब किताब हो कर ही रहेगा। बारबैश कहते हैं कि उनके साथ तो उनका परिवार है लेकिन उनके बाकी रिश्तेदार और दोस्तों का कुछ पता नहीं है। न किसी का फ़ोन मिल रहा है और न ही किसी से बात हो पा रही है।