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बदलाव: रोजगार के लिए शहरों की ओर नहीं भाग रहे ग्रामीण युवा, घर नहीं छोड़ना चाहते; खुद का व्यापार करने में रुचि
Fri, 09 Aug 2024 08:07 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Fri, 09 Aug 2024 08:07 AM IST
सार
ग्रामीण युवाओं की सोच में एक बड़ा बदलाव आया है। अब वह रोजगार के लिए शहर नहीं जाना चाहते बल्कि अपने ही गांव में रुककर अपना उद्यम स्थापित करना चाहते हैं।
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फोटो: 8रेवाड़ी। खेत में उगी बाजरे की फसल। संवाद
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विस्तार
रोजगार की तलाश में ज्यादातर लोग शहर की ओर रुख करते हैं, लेकिन अब अधिकतर युवा अपने गांव में या गांव के आसपास रोजगार में ज्यादा दिलचस्पी रख रहे हैं। 60 फीसदी से ज्यादा ग्रामीण युवा पुरुष और 70 फीसदी महिलाएं रोजगार के लिए पलायन करने के बजाय अपने गांव के नजदीक काम ढूंढ़ना पसंद कर रहे हैं। यह प्राथमिकता ग्रामीण युवाओं में नौकरी के अवसरों की तलाश में घर के नजदीक रहने की इच्छा को दिखाती है।
ग्रामीण युवा रोजगार रिपोर्ट-2024 से पता चलता है कि वर्तमान में कार्यरत 70-85 फीसदी युवा नौकरी बदलने की सोच रहे हैं। उन्हें अपना वर्तमान रोजगार कतई पसंद नहीं है। कॅरिअर बदलने का लक्ष्य रखने वालों में ज्यादातर ने छोटे विनिर्माण, खुदरा या व्यापारिक उद्यम शुरू करने में रुचि दिखाई।
महिलाओं ने शिक्षण को दी प्राथमिकता
युवा महिलाएं सरकारी भूमिकाओं में वेतनभोगी पदों को प्राथमिकता देने के मामले में सबसे आगे रहीं। उन्होंने शिक्षण भूमिकाओं को प्राथमिकता दी। इसके बाद उन्होंने लेखा व फ्रंट डेस्क पर ग्राहकों से मिलने वाली नौकरियों जैसे लिपिक पदों को तरजीह दी, जबकि बिक्री और विपणन की भूमिकाएं कम पसंद की गईं।
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पुरुषों को शिक्षण, लिपिकीय व फैक्टरी में काम करना पसंद
वेतनभोगी रोजगार चाहने वाले पुरुषों ने शिक्षण, लेखा, लिपिकीय नौकरियों के साथ फैक्टरी में काम करना पसंद किया। यह प्राथमिकताएं ग्रामीण भारत में इन व्यवसायों की बढ़ती मांग और गिग वर्क की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती हैं। गिग वर्कर स्वतंत्र ठेकेदार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्कर, कॉन्ट्रैक्ट फर्म वर्कर, ऑन-कॉल वर्कर और अस्थायी कर्मचारी होते हैं।
21 राज्यों में किया सर्वेक्षण
यह निष्कर्ष डेवलपमेंट इंटेलिजेंस यूनिट (डीआईयू) की ओर से 21 राज्यों में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। इसने यह भी दिखाया कि 26-35 वर्ष की आयु के युवाओं में से लगभग 85 फीसदी पुरुष कार्यरत थे, जिनमें से लगभग 10 फीसदी पहले काम करने के बाद वर्तमान में बेरोजगार हैं। इसके विपरीत इस आयु वर्ग की 40 फीसदी महिलाएं कार्यरत थीं।
वित्तीय सहायता पाने में चुनौतियां
व्यवसाय में बदलाव की चाहत रखने वाले युवाओं को वित्तीय सहायता तक समान पहुंच की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लगभग तीन में से एक युवा ने ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध सीमित रोजगार अवसरों की ओर भी इशारा किया। ये चुनौतियां ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर वित्तीय संसाधनों और अधिक विविध रोजगार अवसरों की आवश्यकता को दिखाती हैं।
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ग्रामीण युवा रोजगार रिपोर्ट-2024 से पता चलता है कि वर्तमान में कार्यरत 70-85 फीसदी युवा नौकरी बदलने की सोच रहे हैं। उन्हें अपना वर्तमान रोजगार कतई पसंद नहीं है। कॅरिअर बदलने का लक्ष्य रखने वालों में ज्यादातर ने छोटे विनिर्माण, खुदरा या व्यापारिक उद्यम शुरू करने में रुचि दिखाई।
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महिलाओं ने शिक्षण को दी प्राथमिकता
युवा महिलाएं सरकारी भूमिकाओं में वेतनभोगी पदों को प्राथमिकता देने के मामले में सबसे आगे रहीं। उन्होंने शिक्षण भूमिकाओं को प्राथमिकता दी। इसके बाद उन्होंने लेखा व फ्रंट डेस्क पर ग्राहकों से मिलने वाली नौकरियों जैसे लिपिक पदों को तरजीह दी, जबकि बिक्री और विपणन की भूमिकाएं कम पसंद की गईं।
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पुरुषों को शिक्षण, लिपिकीय व फैक्टरी में काम करना पसंद
वेतनभोगी रोजगार चाहने वाले पुरुषों ने शिक्षण, लेखा, लिपिकीय नौकरियों के साथ फैक्टरी में काम करना पसंद किया। यह प्राथमिकताएं ग्रामीण भारत में इन व्यवसायों की बढ़ती मांग और गिग वर्क की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती हैं। गिग वर्कर स्वतंत्र ठेकेदार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्कर, कॉन्ट्रैक्ट फर्म वर्कर, ऑन-कॉल वर्कर और अस्थायी कर्मचारी होते हैं।
21 राज्यों में किया सर्वेक्षण
यह निष्कर्ष डेवलपमेंट इंटेलिजेंस यूनिट (डीआईयू) की ओर से 21 राज्यों में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। इसने यह भी दिखाया कि 26-35 वर्ष की आयु के युवाओं में से लगभग 85 फीसदी पुरुष कार्यरत थे, जिनमें से लगभग 10 फीसदी पहले काम करने के बाद वर्तमान में बेरोजगार हैं। इसके विपरीत इस आयु वर्ग की 40 फीसदी महिलाएं कार्यरत थीं।
वित्तीय सहायता पाने में चुनौतियां
व्यवसाय में बदलाव की चाहत रखने वाले युवाओं को वित्तीय सहायता तक समान पहुंच की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लगभग तीन में से एक युवा ने ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध सीमित रोजगार अवसरों की ओर भी इशारा किया। ये चुनौतियां ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर वित्तीय संसाधनों और अधिक विविध रोजगार अवसरों की आवश्यकता को दिखाती हैं।