आरएसएस के पश्चिम बंगाल सचिव जिष्णु बसु ने कहा- बंगाली हिंदुओं को बचाने के लिए एनआरसी ही रास्ता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने असम की तरह पश्चिम बंगाल में नेशनल रजिसटर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) की तर्ज पर नागरिकों के कार्यान्वयन की एक सूची बनाने के लिए एक अभियान शुरू किया है। इसके जरिए वह प्रदेश में रहने वाले घुसपैठियो को बाहर निकालने का कार्य करेगा। बांग्लादेश सीमा पर स्थित जिलों यह डोर-टू-डोर अभियान चलाया जा रहा है। जिसके जरिए लोगों को घुसपैठियों से भविष्य में होने वाले खतरों के बारे में बताया जा रहा है।
इसी मामले पर मंगलवार को आरएसएस के पश्चिम बंगाल सचिव जिष्णु बसु ने कहा है कि बांग्लादेशी मुस्लिमों को देश में आने की मंजूरी देने से कई जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल में बंगाली हिंदुओं के होने वाले सर्वनाश को बचाने के लिए एनआरसी ही विकल्प है। बांग्लादेशी हिंदू जिन्होंने कई अत्याचारों का सामना किया है, वह यहां आ रहे हैं और नागरिकता संशोधन विधेयक उनके लिए सहायक होगा।'
बसु ने कहा, 'वहीं दूसरी तरफ यदि हम बांग्लादेशी मुस्लिमों को पश्चिम बंगाल में आने की मंजूरी दे देते हैं तो बहुत से जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं। यदि हम एनआरसी को लागू नहीं करेंगे तो हम घुसपैठियों की संख्या का आंकलन करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे।'
पश्चिम बंगाल सचिव ने आगे कहा, 'पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों के क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हम एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक से जुड़े तथ्यों का प्रचार करने में मदद करने के लिए छोटे समूहों को बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हम सामाजिक संगठन हैं। हम लोगों को केवल तथ्यों के बारे में जागरुक कर सकते हैं।'
Bordering districts in West Bengal are most affected areas. We are trying to make small groups to help propagate facts about NRC and Citizenship Amendment Bill. We are a social organisation, we can only make people aware of facts: RSS West Bengal secy Jishnu Basu pic.twitter.com/lWYTZITEcG
— ANI (@ANI) September 18, 2018