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Hindi News ›   India News ›   RSS trying to project history of freedom struggle through rightist lens: Maha Congress on Gallery of Revolutionaries 

Gallery of Revolutionaries: कांग्रेस का केंद्र सरकार पर निशाना, कहा- गैलरी में मुख्यधारा के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की अनदेखी

Tue, 14 Jun 2022 05:08 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Amit Mandal Updated Tue, 14 Jun 2022 05:08 PM IST
सार

सावंत ने उम्मीद जताई कि अंडमान की जेलों में सजा सुनाई गई और माफी नहीं लिखने वालों के नाम भी शामिल किए जाएंगे। महाराष्ट्र में कई क्रांतिकारियों ने कालापानी की सजा काटी है।

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RSS trying to project history of freedom struggle through rightist lens: Maha Congress on Gallery of Revolutionaries 
Veer Savarkar - फोटो : social media

विस्तार

कांग्रेस ने मंगलवार को मुंबई में राजभवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए जा रहे क्रांतिकारियों की गैलरी में मुख्यधारा के स्वतंत्रता संग्राम को नहीं दिखाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आरएसएस दक्षिणपंथ लेंस के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को दिखाने की कोशिश कर रहा है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने यह भी कहा कि गैलरी में अजीमुल्लाह खान, बाबू जेनु और कम्युनिस्ट नेता श्रीपद डांगे जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नामों का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया था।

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कांग्रेस ने वी डी सावरकर का हवाला देकर उठाए सवाल 
हिंदुत्व विचारक और स्वतंत्रता सेनानी वी डी सावरकर, जिनका नाम क्रांतिकारियों की गैलरी में प्रदर्शित किया जा रहा है, उनका संदर्भ देते हुए सावंत ने उम्मीद जताई कि अंडमान की जेलों में सजा सुनाई गई और माफी नहीं लिखने वालों के नाम भी शामिल किए जाएंगे। महाराष्ट्र में कई क्रांतिकारियों ने कालापानी की सजा काटी है। सावंत ने 1857 के विद्रोह को हिंदुओं और मुसलमानों का संयुक्त संघर्ष करार देते हुए संग्रहालय में 1857 के विद्रोह के अजीमुल्ला खान समेत तमाम क्रांतिकारियों के नाम जोड़े जाएं।
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उन्होंने कहा कि किसानों और मजदूरों के संघर्ष और वारली विद्रोह को भी संग्रहालय में जगह मिलनी चाहिए। दक्षिणपंथी चश्मे के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कई वर्षों से महात्मा गांधी के नेतृत्व में अहिंसक संघर्ष के महत्व को कम करने और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को दिखाने की कोशिश कर रहा है। 
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1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कई शहीद हुए
सावंत ने ट्वीट की एक श्रृंखला में कहा कि मुख्यधारा के स्वतंत्रता संग्राम का इस संग्रहालय में कोई स्थान नहीं है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कई शहीद हुए हैं। दुर्भाग्य से बाबू जेनू का नाम राजभवन प्रेस नोट में नहीं है। श्रीपद डांगे और अन्य कम्युनिस्ट स्वतंत्रता सेनानी भी जेल गए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान विदेशी कपड़े से लदे ट्रक को रोकने की कोशिश करने पर मिल मजदूर जेनू की कुचलकर हत्या कर दी गई थी।


सावंत ने यह भी कहा कि चूंकि संग्रहालय शिक्षाविद विक्रम संपत के मार्गदर्शन में बनाया गया था, इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि टीम के लेंस का इस्तेमाल किया गया था। 2016 में महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल विद्यासागर राव को राजभवन में एक बंकर मिला था। इसका उपयोग पहले अंग्रेजों द्वारा हथियारों और गोला-बारूद के गुप्त भंडारण के रूप में किया जाता था। 2019 में बंकर का नवीनीकरण किया गया था। इसी बंकर में म्यूजियम बनाया गया है।

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