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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   RSS has a big role behind Yogi Adityanath's victory, this strategy will decide the direction of 2024 Lok Sabha elections

संघ का साथ: योगी आदित्यनाथ की जीत के पीछे है RSS की बड़ी भूमिका, 2024 के लोकसभा चुनाव की दिशा तय करेगी ये रणनीति

Fri, 11 Mar 2022 01:54 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Fri, 11 Mar 2022 01:54 PM IST
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सार
उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ प्रचारक ने अमर उजाला को बताया कि हम लोगों से इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रख कर वोट करने की अपील करते थे। इस दौरान हम किसी पार्टी या उम्मीदवार का नाम नहीं लेते थे। बस उनसे इतना ही कहते थे कि 'इस बार वोट राष्ट्र के नाम पर' और मतदाता खुद ही समझ जाते थे। जबकि दूसरे जागरूक मतदाता मंच कार्यक्रम के तहत हम लोगों के घर जाकर उन्हें वोट देने की अपील करते थे...
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RSS has a big role behind Yogi Adityanath's victory, this strategy will decide the direction of 2024 Lok Sabha elections
योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पीएम नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ का जादू चल गया है। भाजपा और योगी आदित्यनाथ की इस बड़ी जीत के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अहम भूमिका बताई जा रही है। आरएसएस ने न केवल पूरे प्रदेश में प्रचार के लिए कई विशेष कार्यक्रम चलाए, बल्कि मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में हिंदू वोट को संगठित करने का काम भी किया। संघ ने जनवरी से ही सभी संगठनों को चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी थी। पदाधिकारियों को साफ हिदायत दी गई थी कि सभी आपसी मनमुटाव छोड़कर मैदान में उतर जाएं। योगी सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाने कई प्लान भी तैयार किए गए थे।

इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों तक पहुंचा संघ

राष्ट्रीय स्वयं संघ ने चुनाव के दौरान काशी से लेकर अवध तक और बुंदेलखंड से लेकर मथुरा तक लोक जागरण मंच प्रोग्राम और जागरूक मतदाता मंच जैसे कार्यक्रम जोर-शोर से चलाए। लोक जागरण मंच कार्यक्रम के जरिए स्वयंसेवकों ने 25 अहम मुद्दों को कवर किया था। इसके लिए संघ ने एक विशेष पर्चा भी छपवाया था। जिसे लेकर कार्यकर्ता आम लोगों के घर तक पहुंचे थे। इनमें राम मंदिर का संघर्ष और उसके निर्माण और महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने वालों को वोट देने की बात कही गई थी। इसके अलावा अपराधियों को जेल में डालने और धर्मांतरण के खिलाफ कड़ी कार्यवाई करने वाले दल को वोट देने जैसी अपील भी की गई थी। पर्चे में काशी विश्वनाथ धाम परिसर का निर्माण, राष्ट्र-राष्ट्रीयता और ऐतिहासिक महापुरुषों का सम्मान बढ़ाने वाले को वोट देने, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और आर्टिकल 35-ए हटाने वालों को वोट देने जैसी अपील भी की गई थी।



उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ प्रचारक ने अमर उजाला को बताया कि हम लोगों से इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रख कर वोट करने की अपील करते थे। इस दौरान हम किसी पार्टी या उम्मीदवार का नाम नहीं लेते थे। बस उनसे इतना ही कहते थे कि 'इस बार वोट राष्ट्र के नाम पर' और मतदाता खुद ही समझ जाते थे। जबकि दूसरे जागरूक मतदाता मंच कार्यक्रम के तहत हम लोगों के घर जाकर उन्हें वोट देने की अपील करते थे। क्योंकि आमतौर पर मतदाता देर से मतदान के लिए निकलते हैं और कभी कभी वोट करना भूल भी जाते हैं। इसलिए हम चाहते थे कि प्रदेश का हर हिंदू वोट करने जाए और जल्द से जल्द जाए, इसलिए हम इस कार्यक्रम के तहत मतदाताओं को वोट जल्द करने के साथ साथ वोट करने का तरीका भी सिखाते थे। इस दौरान संघ मुख्य तौर पर राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर लोगों को वोट करने के लिए मनाता था।

डिजिटल कैंपेन पर किया सबसे ज्यादा फोकस

संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए संघ ने अपना डिजिटल प्रचार प्रसार बढ़ा दिया था। हमने उन लोगों के व्हाट्सएप नंबर एकत्र किए, जिनसे हमारा लगातार मिलना-जुलना होता रहता था। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से उनसे अपने विचार साझा करते थे। कार्यक्रमों और वेबिनार के माध्यम से उन्हें जोड़ते थे। वहीं अपने विचार और सरकार के कामों को सोशल मीडिया के जरिए अन्य लोगों तक भी पहुंचाते थे।

उन्होंने कहा कि, इस प्रचार के दौरान हम उन विधानसभा क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देते थे जहां मुस्लिम आबादी 30 फीसदी से अधिक है और हिन्दू वोट संगठित हैं। राष्ट्रवाद को नैरेटिव बनाने के लिए समय समय पर अलग अलग शहरों में किसान, महिला और यूथ की संगोष्ठी का आयोजन किया जाता था। राष्ट्रीय विचार परिषद के बैनर तले एक दिन में कई बड़े-बड़े सेमिनार और वेबिनार भी आयोजित होते थे। लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के मंच पर भाजपा या उम्मीदवारों को नहीं बुलाया जाता था। न ही हमारे मंच पर उनके कोई बैनर या पोस्टर लगाए जाते थे।

संघ ने जनवरी में की थी मनमुटाव छोड़ने की अपील  

संघ के सभी बड़े पदाधिकारियों ने जनवरी से ही यूपी में चुनाव की तैयारी करनी शुरू कर दी थी। संघ के पदाधिकारियों ने तमाम वैचारिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें चुनाव प्रचार का एजेंडा थमा दिया था। इस दौरान संघ ने साफ कर दिया था कि बिना किसी मनमुटाव के सभी संगठनों के लोग अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े लोगों के बीच सरकार की उपलब्धियां लेकर जाएं। विपक्षी दलों की ओर से फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के साथ-साथ राष्ट्रवाद को मजबूत करने के लिए लोगों से भाजपा को वोट करने की अपील भी करें।

आरएसएस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, सेवा भारती, विद्या भारती, वनवासी कल्याण, शैक्षिक महासंघ, संस्कार भारती, भारतीय किसान संघ, स्वदेशी जागरण मंच, दुर्गा वाहिनी, राष्ट्र सेविका समिति को फरवरी के बाद से ही बूथ स्तर तक सक्रिय कर दिया गया था। दलित वर्ग को साधने के लिए समन्वयक बनाए गए थे, जो दलित बस्तियों में जा रहे थे। वहीं एबीवीपी की ओर से भी युवाओं के बीच अभियान चलाया जा रहा था।

आरएसएस 2024-25 में शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है। शताब्दी वर्ष में संघ ने उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत तक संघ की शाखाओं का विस्तार करने सहित अन्य योजना बनाई है। देश में हिंदुओं की आस्था के प्रतीक अयोध्या, काशी, मथुरा सहित अन्य स्थानों से शताब्दी वर्ष का संदेश पूरी दुनिया में देने की योजना है। जानकारों का मानना है कि 2022 का परिणाम 2024 के लोकसभा चुनाव की भी दिशा तय करेगा। संघ का शताब्दी वर्ष भव्यता के साथ मनाया जाए, इसके लिए प्रदेश व देश में भाजपा की सरकार होना आवश्यक है।

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