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RSS: खाद्य कीमतों के बढ़ने पर आरएसएस महासचिव ने जताई चिंता, बोले- लोग चाहते हैं खाना, कपड़ा और मकान सस्ता हो
Sun, 24 Jul 2022 12:05 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 24 Jul 2022 12:05 AM IST
सार
आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले बोले कि यह स्पष्ट है कि लोग भोजन, कपड़े और आवास को किफायती बनाना चाहते हैं क्योंकि वे जीने के लिए बुनियादी आवश्यकताएं हैं। साथ ही कहा कि सहकारी समितियां इस संबंध में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
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दत्तात्रेय होसबोले
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने शनिवार को कहा कि मुद्रास्फीति और खाने पीने के चीजों की कीमतों को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है और उन्होंने जोर देकर कहा कि लोग चाहते हैं कि भोजन, कपड़ा और मकान सस्ता हो क्योंकि ये बुनियादी जरूरतें हैं। होसबले ने भारत को कृषि में आत्मनिर्भर बनाने का श्रेय आज तक की सभी सरकारों को दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि हालांकि जरूरी चीजें सभी के लिए सस्ती होनी चाहिए, लेकिन किसानों को इसका खामियाजा नहीं उठाना चाहिए।
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आटा और दही जैसे खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाने के बाद आया बयान
दत्तात्रेय होसबले आरएसएस-संबद्ध भारतीय किसान संघ द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और भारतीय कृषि आर्थिक अनुसंधान केंद्र के साथ कृषि पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता की टिप्पणी बढ़ती कीमतों और आटा और दही जैसे बुनियादी खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाने के मुद्दों पर विपक्षी दलों द्वारा केंद्र सरकार पर तीखे हमले के बीच आई है। खाद्य पदार्थों पर जीएसटी को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है।
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लोग भोजन, कपड़े और आवास को किफायती बनाना चाहते हैं
होसाबले ने कहा कि मुद्रास्फीति और खाद्य कीमतों के बीच संबंध के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। आगे कहा कि प्रस्तुति में यह सुझाव दिया गया था कि लोग औद्योगिक उत्पादों के लिए अधिक भुगतान करने के लिए तैयार हैं, लेकिन खाद्य पदार्थों के लिए नहीं। यह स्पष्ट है कि लोग भोजन, कपड़े और आवास को किफायती बनाना चाहते हैं क्योंकि वे जीने के लिए बुनियादी आवश्यकताएं हैं। साथ ही कहा कि सहकारी समितियां इस संबंध में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
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अनाज के मामले में भारत आत्मनिर्भर
कृषि क्षेत्र में विकास के बारे में बात करते हुए, होसबले ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में, कृषि में विकास हम सभी के लिए गर्व की बात है। भारत एक भीख के कटोरे से (खाद्यान्न में) निर्यातक देश बन गया। आगे कहा कि भारत न केवल अनाज के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है, बल्कि दूसरे देशों को भी भेज सकता है और इसका श्रेय आज तक की सभी सरकारों, वैज्ञानिकों और किसानों को जाता है।
किसानों का कद बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए होसाबले ने कहा कि कृषि को आकर्षक बनाने के लिए एक आंदोलन की जरूरत है जिससे गांवों से शहरों की ओर तेजी से पलायन रोकने में मदद मिलेगी। किसानों के लिए कोई गारंटीकृत आय नहीं है और उनकी आजीविका बारिश जैसे कई बाहरी कारकों पर निर्भर है। बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां हैं।
एनसीआरआई जैसे संस्थानों को मजबूत करने की जरूरत
उन्होंने कहा कि लेकिन जिन चीजों मैं पिछड़ रहा हूं वह समाज में एक किसान की सामाजिक स्थिति है। यहां तक कि सबसे निचले स्तर पर सरकारी कार्यक्रमों में, मैंने वकीलों और स्कूल के प्रधानाचार्यों को आमंत्रित किया है, लेकिन किसानों को नहीं। साथ ही कहा कि ग्रामीण औद्योगीकरण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है जो गांवों से शहरों की ओर अनियोजित प्रवास को रोक सकता है। पीवी नरसिम्हा राव द्वारा शुरू किए गए एनसीआरआई जैसे संस्थानों को मजबूत करने की जरूरत है।