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संघ प्रमुख बोले: मुगलों और ईसाईयों से पहले भी था हमारा अस्तित्व, हिंदू बनने के लिए धर्म बदलना जरूरी नहीं
Mon, 26 Sep 2022 01:29 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Mon, 26 Sep 2022 01:29 PM IST
सार
RSS Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख ने कहा, हिंदू शब्द उन सभी को शामिल करता है, जो भारत माता के पुत्र हैं। भारतीय पूर्वजों के वंशज हैं और जो भारतीय संस्कृति के अनुसार रहते हैं।
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मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
RSS Chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत इन दिनों मेघालय दौरे पर हैं। यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संघ का मिशन भारत का सर्वांगीण विकास करना और समाज को संगठित करना है। उन्होंने कहा, आरएसएस व्यक्तिगत स्वार्थों को त्याग कर देश के लिए बलिदान करना सिखाता है।
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मोहन भागवत ने कहा, हिमालय के दक्षिण में, हिंद महासागर के उत्तर में और सिंधु नदी के तट के निवासियों को परंपरागत रूप से हिंदू कहा जाता है। मुगलों और ईसाईयों से पहले भी हिंदू अस्तित्व में थे। उन्होंने कहा, दरअसल, हिंदू एक धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है।
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जो भारत माता का पुत्र वह हिंदू
आरएसएस प्रमुख ने कहा, हिंदू शब्द उन सभी को शामिल करता है, जो भारत माता के पुत्र हैं। भारतीय पूर्वजों के वंशज हैं और जो भारतीय संस्कृति के अनुसार रहते हैं। उन्होंने कहा, भारत में रहने वाला हर कोई हिंदू है। हिंदू बनने के लिए धर्म बदलने की आवश्यकता नहीं है। भारत पश्चिमी अवधारणा वाला देश नहीं है।
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भारत ने दुनिया को पढ़ाया मानवता का पाठ
मोहन भागवत ने कहा, आध्यात्मिकता पर आधारित सदियों पुराने मूल्यों में निहित विश्वास देश के लोगों के बीच बाध्यकारी शक्ति है। हमारे पूर्वजों ने विभिन्न विदेशी भूमि का दौरा किया था और जापान, कोरिया, इंडोनेशिया और कई अन्य देशों को समान मूल्य प्रदान किए थे। उन्होंने कहा, भारत एक ऐसा देश है जिसने दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया है। भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान विभिन्न देशों को टीके भेजकर मानवता की सेवा की और आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका के साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा, जब भारत शक्तिशाली होता है, तो हर नागरिक शक्तिशाली होता है।
भारत का समग्र विकास ही संघ का लक्ष्य : भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत का समग्र विकास ही उनके स्वयंसेवी संगठन का लक्ष्य है। उन्होंने कहा, आरएसएस का लक्ष्य समाज को संगठित करना है, ताकि भारत चहुंमुखी विकास कर सके। संघ व्यक्तिगत स्वार्थों को त्यागकर देश के लिए बलिदान करना सिखाता है।
आध्यात्मिकता पर आधारित सदियों पुराने मूल्यों में निहित आस्था देश के लोगों को बांधने वाली शक्ति है। भागवत ने कहा, भारतीय एवं हिंदू एक समानार्थी भू-सांस्कृतिक पहचान हैं। हम सभी हिंदू हैं। भारतीयों ने देश के प्राचीन इतिहास से बलिदान की परंपरा सीखी।
हमारे पूर्वज विभिन्न विदेशी भूमि पर गए और उन्होंने जापान, कोरिया, इंडोनेशिया और कई अन्य देशों को भी यही मूल्य दिए। भागवत ने कहा, भारत ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान विभिन्न देशों में टीके भेजकर मानवता की सेवा की और वह आर्थिक संकट में श्रीलंका के साथ खड़ा रहा। जब भारत शक्तिशाली बनता है तो हर नागरिक शक्तिशाली बनता है।