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Hindi News ›   India News ›   RSS Chief Mohan Bhagwat: Lord Ram Has Always Existed, Valmiki Wrote Ramayana to End Human Suffering

RSS: 'राम सदा विद्यमान रहे, वाल्मीकि ने दुखों को दूर करने के लिए लिखी रामायण'; वाल्मीकि जयंती पर बोले भागवत

Thu, 09 Oct 2025 05:09 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 09 Oct 2025 05:09 AM IST
सार

Valmiki Jayanti: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भगवान राम सदा विद्यमान रहे और महर्षि वाल्मीकि ने मानवता के कल्याण हेतु रामायण की रचना की।

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RSS Chief Mohan Bhagwat: Lord Ram Has Always Existed, Valmiki Wrote Ramayana to End Human Suffering
मोहन भागवत (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भगवान राम सदैव अस्तित्व में रहे हैं। लेकिन महर्षि वाल्मीकि ने भगवान राम को घर-घर तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने विश्व के दुखों को दूर करने के लिए रामायण की रचना की थी। भारतीयों को मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी के रूप में इस संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए।

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संघ प्रमुख ने यहां वाल्मीकि समाज सेवा मंडल की ओर से आयोजित महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह ही हैं जो भगवान राम को हमारे जीवन में लाए। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि ने रामायण लिखी और इसे लोगों के साथ साझा किया क्योंकि उनका हृदय करुणा और अपनेपन की भावना से भरा था।
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भगवान राम ने जीने का तरीका सिखाया
संघ प्रमुख ने कहा कि भगवान राम हमें सिखाते हैं कि जीवन कैसे जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामायण हमें बताती है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य को एक-दूसरे के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए। एक आदर्श सेवक कैसा होना चाहिए, एक आदर्श मंत्री को राजा का मार्गदर्शन कैसे करना चाहिए। भगवान राम इन गुणों का उदाहरण हैं, और उनके समर्पित अनुयायी भगवान हनुमान हैं।
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रामायण में भक्ति के अनेकों उदाहरण
भागवत ने कहा कि रामायण में विभीषण और सुग्रीव जैसे भक्ति के अनगिनत उदाहरण हैं। जीवन में हर प्रकार के व्यक्ति के लिए, वाल्मीकि की रामायण आचरण का मार्गदर्शन प्रदान करती है। उन्होंने केवल एक कहानी नहीं सुनाई, हमें जीवन के लिए एक शाश्वत संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आध्यात्मिकता, सद्भावना और अच्छे आचरण के लिए प्रसिद्ध है और यह विरासत रामकथा से उपजी है।

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